700 छात्रों के अनुक्रमांक फ्रीज कांड में बड़ा एक्शन
🔴अधिनियम-2024 की धाराओं में मुकदमा दर्ज करने का आदेश
🔴नोडल अधिकारी विकास मणि त्रिपाठी व प्रधान लिपिक ज्ञान प्रकाश पाठक पर गिरेगी कानूनी गाज
टाइम्स ऑफ़ कुशीनगर ब्यूरो
कुशीनगर। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की वर्ष 2026 की इंटरमीडिएट परीक्षा में 700 पंजीकृत परीक्षार्थियों के आवेदन निरस्त कर अनुक्रमांक फ्रीज किए जाने के बहुचर्चित मामले में शासन ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रकरण में पत्राचार पंजीकरण केंद्र संख्या 901, गोस्वामी तुलसीदास इंटर कॉलेज, पडरौना के नोडल अधिकारी एवं प्रधान लिपिक के विरुद्ध आपराधिक मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश जारी किए गए हैं।
पत्राचार शिक्षा संस्थान, उत्तर प्रदेश के अपर शिक्षा निदेशक (पत्राचार) द्वारा जिला विद्यालय निरीक्षक, कुशीनगर को भेजे गए आदेश में स्पष्ट किया गया है कि प्रकरण में दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम-2024 की धारा 2(च) एवं धारा 14 के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत कराया जाए।धारा 2(च) के अंतर्गत सार्वजनिक परीक्षा से संबंधित किसी भी प्रकार की अनियमितता, कदाचार अथवा परीक्षा प्रक्रिया में हस्तक्षेप को परिभाषित किया गया है, जबकि धारा 14 में दोष सिद्ध होने पर कठोर दंडात्मक प्रावधान — जिसमें कारावास एवं आर्थिक दंड शामिल है — का उल्लेख है। इसके अतिरिक्त विभागीय सेवा नियमावली के अंतर्गत निलंबन, वेतनवृद्धि रोकने या सेवा से पृथक्करण जैसी अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।
प्रकरण में 700 इंटरमीडिएट परीक्षार्थियों के आवेदन निरस्त कर उनके अनुक्रमांक फ्रीज व विलोपित कर दिए गए, जिससे छात्रों और अभिभावकों में भारी रोष व्याप्त है। यह सवाल उठ रहा है कि आवेदन निरस्तीकरण तकनीकी त्रुटि का परिणाम था, प्रशासनिक लापरवाही या फिर कोई सुनियोजित षड्यंत्र। यदि जांच में परीक्षा प्रक्रिया से छेड़छाड़ अथवा कर्तव्य में घोर लापरवाही सिद्ध होती है तो मामला दंडनीय अपराध की श्रेणी में आएगा।
जिला विद्यालय निरीक्षक को निर्देशित किया गया है कि संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध स्थानीय थाने में प्राथमिकी दर्ज कर समस्त अभिलेख, डिजिटल डाटा एवं पत्राचार दस्तावेज सुरक्षित रखते हुए शासन को विस्तृत आख्या उपलब्ध कराएं। यह प्रकरण केवल 700 छात्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। अब निगाहें जांच और कानूनी कार्रवाई पर टिकी हैं कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई होती है या नहीं।


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