महाव नाले का तटबंध टूटा, सैकड़ों बीघा फसल जलमग्न

महाव नाले का तटबंध टूटा, सैकड़ों बीघा फसल जलमग्न; किसानों ने मुआवजे और जांच की उठाई मांग
तटबंध टूटने से धान समेत खरीफ की फसलें जलमग्न, किसानों ने सिंचाई विभाग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

टाइम्स ऑफ कुशीनगर ब्यूरो

महराजगंज। महाव नाले का तटबंध टूटने से आसपास के गांवों के किसानों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। नाले का पानी खेतों में भर जाने से धान सहित अन्य खरीफ फसलें जलमग्न हो गई हैं। किसानों का कहना है कि इससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ है और उनकी महीनों की मेहनत पर पानी फिर गया है।

प्रभावित किसानों का आरोप है कि यदि सिंचाई विभाग समय रहते तटबंध की मरम्मत और नियमित निगरानी करता, तो यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती। उनका कहना है कि महाव नाले के रखरखाव और मरम्मत पर हर वर्ष लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन तटबंध टूटने की घटना ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों का तत्काल सर्वे कराया जाए और फसलों के नुकसान का आकलन कर उन्हें नियमानुसार मुआवजा उपलब्ध कराया जाए। उनका कहना है कि तटबंध टूटने से हुए नुकसान की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि समय पर निरीक्षण और रखरखाव किया गया होता तो फसलों को इतना नुकसान नहीं उठाना पड़ता।

हालांकि, सिंचाई विभाग की ओर से तटबंध टूटने के कारणों तथा किसानों द्वारा लगाए गए आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

टाइम्स ऑफ कुशीनगर सिंचाई विभाग और जिला प्रशासन का पक्ष प्राप्त करने का प्रयास कर रहा है। उनका पक्ष प्राप्त होते ही उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।



रिपोर्टर: रणजीत मोदनवाल

टाइम्स ऑफ कुशीनगर

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