टाइम्स ऑफ़ कुशीनगर ब्यूरो, कुशीनगर। विश्व शांति और बौद्ध पर्यटन की पहचान रखने वाली कुशीनगर नगरी इन दिनों कथित देह व्यापार के बढ़ते नेटवर्क को लेकर चर्चाओं में है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नेशनल हाईवे किनारे संचालित कई होटल, लॉज और रेस्टोरेंट की आड़ में खुलेआम अवैध गतिविधियां संचालित हो रही हैं, जबकि कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई जा रही है।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार हिरनहापुर से लेकर गोपालगढ़ तक हाईवे किनारे स्थित कुछ होटल और रेस्टोरेंट संदिग्ध गतिविधियों के केंद्र बने हुए हैं। वहीं पकवाइनार और पथिक निवास क्षेत्र के आसपास भी इस तरह की गतिविधियों को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं। लोगों का कहना है कि दिन में भी संदिग्ध लोगों की आवाजाही बनी रहती है तथा देर रात लग्जरी वाहनों का आना-जाना आम बात हो चुकी है।क्षेत्र में चर्चा है कि इस पूरे नेटवर्क में होटल संचालकों, दलालों और कथित संरक्षणदाताओं की एक श्रृंखला सक्रिय है। सूत्र बताते हैं कि बाहर से आने वाले ग्राहकों के लिए बाकायदा “सेटिंग सिस्टम” के जरिए व्यवस्था संचालित की जाती है।स्थानीय लोगों में सबसे ज्यादा नाराजगी इस बात को लेकर है कि पुलिस की कार्रवाई से पहले ही संबंधित लोगों तक सूचना पहुंच जाती है। नागरिकों का आरोप है कि कई बार छापेमारी केवल औपचारिकता बनकर रह जाती है और छोटे स्तर पर कार्रवाई कर मामले को शांत कर दिया जाता है, जबकि बड़े नेटवर्क तक हाथ नहीं पहुंच पाता।लोगों के बीच यह चर्चा भी तेज है कि कुछ कारोबारी कथित “महीना व्यवस्था” के भरोसे बेखौफ होकर कारोबार चला रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन लगातार उठ रहे सवालों ने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थलों के आसपास इस तरह की गतिविधियां न सिर्फ सामाजिक माहौल को प्रभावित कर रही हैं, बल्कि विदेशी पर्यटकों के बीच भी गलत संदेश जा रहा है। बुद्ध की नगरी की आध्यात्मिक पहचान पर इसका प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।सूत्रों के अनुसार इस नेटवर्क में शामिल महिलाओं और युवतियों की परिस्थितियां अलग-अलग हैं। कुछ आर्थिक तंगी और पारिवारिक दबाव के चलते इस दलदल में उतरती हैं, जबकि कुछ आधुनिक जीवनशैली और तेज कमाई के आकर्षण में इसमें फंस जाती हैं।स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर अवैध गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो इससे न सिर्फ पर्यटन नगरी की छवि धूमिल होगी, बल्कि पूरे क्षेत्र के सामाजिक वातावरण पर भी गंभीर असर पड़ सकता है।
रिपोर्टर: व्यूरों
टाइम्स ऑफ कुशीनगर

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