एक एकड़ में 8 लाख रुपये का केला, खेती ने बदल दी किस्मत : प्रगतिशील किसान मनीष दुबे
केला की जी-9 'भीम प्लस' प्रजाति दे रही बेहतर उत्पादन : ए.के. सिंह
टाइम्स ऑफ कुशीनगर ब्यूरो
कुशीनगर। पडरौना तहसील क्षेत्र के ग्राम पड़री पिपरपाती निवासी प्रगतिशील किसान मनीष दुबे ने केला की खेती से उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। उन्होंने बताया कि एक एकड़ में जी-9 (भीम प्लस) प्रजाति के केले की खेती से लगभग 8 से 8.5 लाख रुपये का उत्पादन मिलने की उम्मीद है। उनका कहना है कि "केले की खेती ने मेरा भाग्य बदल दिया।"मनीष दुबे ने बताया कि उन्होंने 25 जून 2025 को एक एकड़ खेत में कैडला भीम प्लस जी-9 टिश्यू कल्चर केले की रोपाई की थी। उनके खेत का निरीक्षण करने पहुंचे कैडला फार्मास्युटिकल डिवीजन एग्रो के जोनल मैनेजर ए.के. सिंह ने फसल की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता की सराहना की तथा खेती की तकनीकी जानकारी ली।
निरीक्षण के दौरान मनीष दुबे ने बताया कि उन्होंने पौधे से पौधे तथा पंक्ति से पंक्ति की दूरी 6-6 फीट रखी है। एक एकड़ में लगभग 1300 पौधों की रोपाई की गई। प्रत्येक पौधा 16 रुपये में खरीदा गया था। उन्होंने खेत में गोबर की सड़ी खाद का प्रयोग किया तथा जैव पोटाश, सूक्ष्म तत्व, कैड ग्रो और न्यूट्रीफास का समय-समय पर उपयोग किया। अब तक 8 से 9 बार सिंचाई की जा चुकी है।
उन्होंने बताया कि प्रत्येक पौधे से लगभग 30 से 35 किलोग्राम तक केला मिलने की संभावना है। वर्तमान बाजार मूल्य लगभग 21 रुपये प्रति किलोग्राम है। अनुमानित उत्पादन 400 से 425 क्विंटल रहेगा, जिससे कुल आय 8 से 8.5 लाख रुपये तक पहुंच सकती है। यह फसल लगभग 13 माह में तैयार होती है।
मनीष दुबे ने बताया कि पूर्व सहायक निदेशक (गन्ना), गन्ना विशेषज्ञ एवं गन्ना विकास सलाहकार ओम प्रकाश गुप्ता की सलाह पर उन्होंने नवंबर के प्रथम सप्ताह में केले के साथ आलू की सहफसली खेती भी की थी। इससे 45 क्विंटल आलू का उत्पादन हुआ, जिसे लगभग 45 हजार रुपये में बेचा गया।
उन्होंने बताया कि केले की खेती में रोपाई से लेकर फसल तैयार होने तक लगभग एक लाख रुपये का खर्च आया। आलू की बिक्री से 45 हजार रुपये प्राप्त हो गए, जिससे उनकी वास्तविक लागत लगभग 50 हजार रुपये ही रही।
मनीष दुबे की पत्नी कुमुद द्विवेदी ने बताया कि उनके परिवार के पास चार गाय हैं और प्रतिदिन लगभग 25 लीटर दूध की बिक्री होती है। उन्होंने कहा कि खेत में गोबर की खाद के उपयोग से केले की फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में काफी लाभ मिला।
जोनल मैनेजर ए.के. सिंह ने मनीष दुबे के परिश्रम और वैज्ञानिक खेती की सराहना करते हुए कहा कि जी-9 (भीम प्लस) प्रजाति बेहतर उत्पादन देने वाली किस्म है। उन्होंने आसपास के किसानों को भी आधुनिक तकनीक, संतुलित पोषण प्रबंधन तथा कैडला एग्रो के उत्पादों के सही उपयोग की जानकारी दी।
इस अवसर पर कैडला एग्रो के कर्मचारी सुनील कुशवाहा ने बताया कि क्षेत्र के पांच किसानों ने इस वर्ष लगभग 50 हजार केले के पौधे खरीदे हैं और वैज्ञानिक तरीके से केले की खेती की ओर तेजी से रुझान बढ़ रहा है।
रिपोर्टर: के.एन. राय
टाइम्स ऑफ कुशीनगर
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