शिकायतकर्ता अभिषेक कुमार यादव ने 9 जुलाई को मंडलायुक्त को भेजे शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि तत्कालीन जिला प्रोबेशन अधिकारी के कार्यकाल में शासनादेशों की अनदेखी करते हुए आउटसोर्सिंग भर्ती कराई गई। उनका कहना है कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन न किए जाने से पात्र अभ्यर्थियों के अधिकार प्रभावित हुए तथा सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका उत्पन्न हुई।
जांच रिपोर्ट के अनुसार भर्ती प्रक्रिया में कई स्तरों पर निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया। रिपोर्ट में उल्लेख है कि आवेदन की अंतिम तिथि शासनादेशों के विपरीत बढ़ाई गई।
इसके अलावा, एक पद पर न्यूनतम पांच अभ्यर्थियों को साक्षात्कार का अवसर दिए जाने के प्रावधान के बावजूद 174 आवेदन प्राप्त होने के बाद भी कुछ पदों पर सीमित अभ्यर्थियों को ही बुलाया गया।
जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि जिला मैनेजर/कोऑर्डिनेटर पद पर चयनित एक अभ्यर्थी के आवेदन से संबंधित आवश्यक अभिलेख उपलब्ध नहीं मिले। जांच रिपोर्ट में इस संबंध में भी टिप्पणी दर्ज की गई है।
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि चयनित 10 अभ्यर्थियों में से 8 एक ही जाति से संबंधित हैं। उनका कहना है कि इससे चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगता है। हालांकि इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष सक्षम प्राधिकारी द्वारा ही तय किया जाएगा।अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) ने अपनी जांच आख्या में चयन प्रक्रिया की पुनर्समीक्षा कराए जाने की संस्तुति की थी।इसके बावजूद अब तक कोई कार्रवाई सामने नहीं आने पर शिकायतकर्ता ने मंडलायुक्त गोरखपुर से पूरे मामले की पुनः जांच कराते हुए चयन प्रक्रिया निरस्त करने, दोषी अधिकारियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कराने तथा विवादित भुगतान की रिकवरी कराने की मांग की है।मामले में संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
रिपोर्टर: अजय कुमार त्रिपाठी
टाइम्स ऑफ कुशीनगर


.jpg)

0 टिप्पणियाँ
टिप्पणी करने के लिए आप को धन्यबाद!
.................................TIMES OF KUSHINAGAR