राजकीय बौद्ध संग्रहालय में लगी विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस प्रदर्शनी
टाइम्स ऑफ कुशीनगर ब्यूरो
कुशीनगर। विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर बुधवार को राजकीय बौद्ध संग्रहालय, कुशीनगर में देश के विभाजन की त्रासदी पर आधारित विशेष छायाचित्र एवं पोस्टर प्रदर्शनी आयोजित की गई। प्रदर्शनी का उद्घाटन सांसद कुशीनगर विजय कुमार दुबे ने किया। इस अवसर पर जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर, मुख्य विकास अधिकारी वंदिता श्रीवास्तव, संग्रहालयाध्यक्ष सहित अधिकारी, छात्र-छात्राएं एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।
14 अगस्त 1947 का दिन देश की आजादी की दहलीज पर खड़े भारत के इतिहास में जहां स्वतंत्रता की पूर्व संध्या थी, वहीं विभाजन की पीड़ा का भी साक्षी बना। भारत का विभाजन केवल नक्शे पर खींची गई एक लकीर नहीं था, बल्कि इसने लाखों परिवारों के घर, रिश्ते, रोजगार और जीवन की दिशा बदल दी। नफरत और हिंसा के बीच असंख्य लोगों को अपना घर-बार छोड़कर अनजान रास्तों पर निकलना पड़ा। किसी ने अपनों को खोया तो किसी ने जीवनभर की जमा-पूंजी पीछे छोड़ दी।
इसी दर्दनाक इतिहास को याद करने और नई पीढ़ी को विभाजन की त्रासदी से परिचित कराने के उद्देश्य से आयोजित प्रदर्शनी में 52 पोस्टरों के माध्यम से विभाजन के समय की घटनाओं, विस्थापित लोगों की स्थिति और उस दौर के सामाजिक माहौल को चित्रों एवं दस्तावेजों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। पोस्टरों में नजर आती भीड़, सामान समेटकर घर छोड़ते परिवार और अनिश्चित भविष्य की ओर बढ़ते लोग उस दौर की भयावहता को जीवंत करते नजर आए।
सांसद विजय कुमार दुबे ने प्रदर्शनी का उद्घाटन करने के बाद पूरे सभागार का अवलोकन किया और विभाजन से संबंधित प्रत्येक पोस्टर को देखा। उन्होंने कहा कि विभाजन भारतीय इतिहास की अत्यंत बड़ी त्रासदी थी। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने अपने स्वजन खोए और लाखों लोगों को विस्थापन का दंश झेलना पड़ा। उन्होंने कहा कि विभाजन किसी भी समस्या का समाधान नहीं होता, बल्कि इससे नई समस्याएं जन्म लेती हैं। इसलिए समाज को एकता, संगठन, सामाजिक सद्भाव और मानवीय संवेदनाओं को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए कहा कि विभाजन की त्रासदी हमें इतिहास से सीख लेने का संदेश देती है। आने वाली पीढ़ियों को इतिहास की वास्तविक घटनाओं और उनके मानवीय प्रभाव से परिचित कराना आवश्यक है, ताकि समाज में आपसी भाईचारा, सामाजिक सद्भाव और एकता की भावना और मजबूत हो। उन्होंने कहा कि नफरत और हिंसा का सबसे अधिक दुष्परिणाम आम लोगों को ही भुगतना पड़ता है, इसलिए आपसी विश्वास और सौहार्द को सदैव प्राथमिकता देनी चाहिए।
जिलाधिकारी ने बच्चों के साथ छायाचित्र लेकर उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने एनसीसी कैडेट्स से संवाद करते हुए उनके भविष्य और करियर से संबंधित जानकारी भी प्राप्त की। इस दौरान उन्होंने कैडेट्स का उत्साह बढ़ाया।
प्रदर्शनी देखने पहुंचे छात्र-छात्राओं में भी खासा उत्साह नजर आया। बच्चों ने प्रदर्शनी में लगाए गए पोस्टरों एवं चित्रों को ध्यानपूर्वक देखा और विभाजन के इतिहास से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं। बच्चों ने प्रदर्शनी के दौरान छायाचित्र लेकर इन यादगार पलों को कैमरे में कैद किया। इस दौरान उन्होंने विभाजन की त्रासदी को समझने और इतिहास से सीख लेकर देश की एकता, अखंडता एवं सामाजिक सद्भाव को मजबूत बनाने का संदेश दिया।
प्रदर्शनी देखने पहुंचे अधिकारियों, आमजन तथा छात्र-छात्राओं ने पोस्टरों में प्रदर्शित विभाजन की घटनाओं को गंभीरता से देखा। चित्रों और दस्तावेजों के माध्यम से उस समय की परिस्थितियों को देखकर कई लोग भावुक नजर आए। प्रदर्शनी ने विभाजन के दौरान लोगों द्वारा झेली गई पीड़ा, विस्थापन और संघर्ष की स्मृतियों को सामने रखा।
इस अवसर पर बताया गया कि 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाने का उद्देश्य विभाजन के दुखद अध्याय को याद करना तथा उसके दुष्परिणामों से वर्तमान एवं भावी पीढ़ियों को अवगत कराना है। यह दिवस समाज में एकता, सामाजिक सद्भाव और मानवीय संवेदनाओं के महत्व को रेखांकित करता है।
प्रदर्शनी के माध्यम से यह संदेश भी दिया गया कि वर्ष 1947 का विभाजन केवल दो देशों के निर्माण तक सीमित घटना नहीं थी, बल्कि इसने करोड़ों लोगों के जीवन को प्रभावित किया। परिवार बिछड़े, लोगों को अपनी जड़ों से दूर होना पड़ा और लाखों लोगों को नए स्थानों पर फिर से अपना जीवन शुरू करना पड़ा। विभाजन की त्रासदी की स्मृति आने वाली पीढ़ियों को यह सीख देती है कि सामाजिक सौहार्द, आपसी विश्वास और मानवीय संवेदनाएं किसी भी समाज की सबसे बड़ी ताकत हैं।
रिपोर्टर:ब्यूरो
टाइम्स ऑफ कुशीनगर

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