कुशीनगर में 45 लाख पौधरोपण का लक्ष्य, क्या इस बार पौधे बचा पाएगा प्रशासन
वन विभाग लगाएगा 14.50 लाख, 23 विभाग लगाएंगे 30.67 लाख पौधे,
प्रभागीय वनाधिकारी खुद मान चुके हैं- 10 लाख लगते हैं, बचते नहीं
टाइम्स ऑफ कुशीनगर ब्यूरो
पडरौना, कुशीनगर। सावन सिर पर है और जिले में एक बार फिर पौधरोपण का सरकारी उत्सव शुरू होने वाला है। कागज तैयार हैं, लक्ष्य तय है, छायाचित्र खिंचवाने के लिए गड्ढे भी चिन्हित हो रहे हैं। इस बार आंकड़ा है 45 लाख 17 हजार पौधे। जिला प्रशासन के लक्ष्य पत्र 2026-27 के अनुसार वन विभाग अकेले 14 लाख 50 हजार पौधे लगाएगा और बाकी 23 विभाग मिलकर 30 लाख 67 हजार पौधे लगाएंगे।
अकेले ग्राम्य विकास को 16 लाख 58 हजार, कृषि को 5 लाख 1 हजार, उद्यान को 2 लाख 49 हजार और पंचायतीराज को 1 लाख 85 हजार पौधे थमा दिए गए हैं। पर्यावरण को 1 लाख 49 हजार और राजस्व को 1 लाख 26 हजार का जिम्मा दिया गया है। जोड़ लगाइए तो 45 लाख बैठता है।
यह पहला साल नहीं है। पिछले साल 39 लाख 72 हजार और उससे पहले 37 लाख 42 हजार पौधे कागज पर लग चुके हैं। तीन साल में 1 करोड़ 20 लाख से ज्यादा पौधे। अगर ये धरती पर होते तो कुशीनगर आज जंगल होता, पर सच्चाई में अमृत सरोवरों के किनारे और नहर की पटरियों पर सिर्फ पट्टिकाएं मिलती हैं, पौधे नहीं।
इस खेल पर मुहर खुद वन विभाग के अधिकारी ने लगाई है। एक दैनिक समाचार पत्र में 21 मार्च 2025 को दिए गए बयान में प्रभागीय वनाधिकारी वरुण सिंह ने कहा था कि हर साल 10 लाख से अधिक पौधे लगते हैं, फिर भी हरियाली कम है। उन्होंने माना था कि देखभाल के अभाव में पौधे पेड़ बन ही नहीं पाते।
मुख्य विकास अधिकारी भी इस कागजी हरियाली को पकड़ चुकी हैं। 8 फरवरी 2026 को विकास भवन में समीक्षा के दौरान मुख्य विकास अधिकारी वंदिता श्रीवास्तव ने पाया कि 9 जुलाई 2025 को एक दिन में रोपे गए 39 लाख 72 हजार पौधों की भौगोलिक स्थिति की पहचान तक राजस्व विभाग ने पूरी नहीं की है। उन्होंने तीन दिन में शत-प्रतिशत पहचान का निर्देश दिया था, पर आख्या आज तक सार्वजनिक नहीं हुई।
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की आख्या तो और भी डरावनी है। 1 अगस्त 2024 को विधानसभा में पेश आख्या में कहा गया कि 22 जिलों की जांच में 20 जिलों में बिना कार्ययोजना के पौधे लगा दिए गए। 20 वन प्रभागों में स्कूटर-मोटरसाइकिल के नंबर पर खुदाई मशीन का बिल लगाकर 1.37 करोड़ हड़प लिए गए। 88 करोड़ खर्च के बाद भी 100 में से 72 पौधे मर गए।
जगह से ज्यादा लक्ष्य, इसलिए नहीं बचते पौधे
उदित नारायण स्नातकोत्तर महाविद्यालय पडरौना के भूगोल विभाग के विभागाध्यक्ष संजय सिंह कहते हैं कि मैं खुद इस पौधरोपण का हिस्सा रह चुका हूं। पौधों को बचाया नहीं जा सकता, कारण यह है कि जगह से ज्यादा पौधों का लक्ष्य दे दिया जाता है और दबाव में लोग जैसे-तैसे लगाते हैं। कुछ बाहर के लोग, कुछ पशु इनको नष्ट कर देते हैं।
उन्होंने कहा कि लक्ष्य कम हो और जिम्मेदारी तय हो कि इस पौधे को सुरक्षित लगाना है और बचाना है, तो निश्चित रूप से पौधरोपण कारगर होगा। अन्यथा लक्ष्य बढ़ाना और जबरन थोप देना कि इतने पौधे लगाओ, यह अनुचित है। ऐसे हरियाली नहीं आएगी। लक्ष्य तय हो और नष्ट होने पर दंड भी तय हो। उन्होंने पड़ोसी राज्य बिहार का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां सड़कों के किनारे लगे पौधे बेहतर हैं, क्योंकि वहां जिम्मेदारी तय है कि नुकसान हुआ तो जुर्माना देना पड़ेगा।
अब जनता पूछ रही है कि पिछले साल लगे 39 लाख 72 हजार पौधों में से कितने जीवित हैं और उनकी सूची सार्वजनिक कब होगी? इस बार 45 लाख पौधों की एक साल तक देखभाल की जिम्मेदारी किसे दी जाएगी या उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया जाएगा? और जब प्रभागीय वनाधिकारी खुद मानते हैं कि पौधे बचते नहीं तो हर साल लक्ष्य बढ़ाने का खेल क्यों चल रहा है? मानसून आ गया है, जल्द ही गड्ढे खोदे जाएंगे, छायाचित्र खिंचेगी और छपेगा कि कुशीनगर ने इतिहास रच दिया। लेकिन ये कब तक चलेगा। क्या इस बार प्रशासन सिर्फ पौधे लगाएगा, या उन्हें बचाकर पेड़ बनने तक भी पहुंचाएगा
रिपोर्टर: ब्यूरो
टाइम्स ऑफ कुशीनगर
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