मुकदमा वापस लेने की धमकी का आरोप, चित्रगुप्त मंदिर समिति ट्रस्ट अध्यक्ष ने उठाए सवाल


न्यायालय में विचाराधीन मामले को प्रभावित करने की कोशिश का आरोप, ट्रस्टियों में आक्रोश

टाइम्स ऑफ कुशीनगर ब्यूरो

कुशीनगर। पडरौना नगर स्थित श्री चित्रगुप्त मंदिर की भूमि, रखरखाव, जीर्णोद्धार, मंदिर निर्माण और परिसर में संचालित गौशाला को लेकर चल रहा विवाद अब न्यायालय तक पहुंचने के बाद कथित धमकी और दबाव के आरोपों तक पहुंच गया है। चित्रगुप्त मंदिर समिति न्यास (ट्रस्ट) के अध्यक्ष नरेंद्र वर्मा ने आरोप लगाया है कि न्यायालय में वाद दाखिल किए जाने के करीब दो माह बाद उन्हें फोन कर मुकदमा वापस लेने की धमकी दी गई।

ट्रस्ट अध्यक्ष नरेंद्र वर्मा के अनुसार, भीटा की जमीन पर वर्षों से श्री चित्रगुप्त मंदिर स्थापित है। उनका आरोप है कि कुछ लोग अपने पूर्वजों के नाम कथित रूप से फर्जी पट्टा तैयार कर मंदिर की भूमि पर अवैध कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भीटा की भूमि का पट्टा नहीं किया जा सकता और वर्तमान में सरकारी अभिलेखों में मंदिर से संबंधित भूमि आबादी के रूप में दर्ज है।



नरेंद्र वर्मा का कहना है कि कथित अवैध कब्जे और निर्माण के प्रयासों के खिलाफ ट्रस्ट की ओर से सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की अदालत में वाद दाखिल किया गया है। उनका आरोप है कि मामला न्यायालय में पहुंचने के बाद पहले समझौते के नाम पर दबाव बनाया गया और बाद में मुकदमा वापस लेने के लिए संदेश भेजे गए।

ट्रस्ट अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सोमवार को पडरौना कोतवाली क्षेत्र के बेलवा निवासी सतीश श्रीवास्तव ने उन्हें फोन किया और कथित तौर पर मुकदमा वापस नहीं लेने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। नरेंद्र वर्मा के मुताबिक, बातचीत का लहजा आक्रामक था और उन्हें यह सामान्य बातचीत के बजाय खुली चेतावनी जैसी लगी।

ट्रस्ट अध्यक्ष का कहना है कि मामला गंभीर इसलिए है क्योंकि विवाद किसी निजी संपत्ति से संबंधित नहीं, बल्कि धार्मिक स्थल और उससे जुड़ी भूमि का है। ट्रस्ट का दावा है कि मंदिर परिसर की भूमि पर करीब 18 वर्षों से गौशाला संचालित हो रही है। इसके अलावा मंदिर का रखरखाव, विकास, सुरक्षा और धार्मिक आयोजनों का संचालन भी लंबे समय से ट्रस्ट द्वारा किया जाता रहा है।

ट्रस्ट ने आरोप लगाया है कि कुछ लोग भगवान श्री चित्रगुप्त के नाम से मिलता-जुलता एक एनजीओ बनाकर मंदिर की भूमि पर कथित रूप से कब्जा करने और वहां कॉम्प्लेक्स, धर्मशाला तथा व्यावसायिक प्रतिष्ठान बनाने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

नरेंद्र वर्मा ने कहा कि यदि भविष्य में उनके या ट्रस्ट के महासचिव संजय चाणक्य, संयोजक देवेंद्र प्रताप, कोषाध्यक्ष हरेंद्र वर्मा समेत किसी भी ट्रस्टी के साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो इसके लिए उन्होंने धमकी देने वाले व्यक्ति और संबंधित लोगों को जिम्मेदार बताया है।

कथित धमकी की जानकारी सामने आने के बाद ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों और ट्रस्टियों में आक्रोश है। उनका सवाल है कि जब मामला न्यायालय में विचाराधीन है तो फिर धमकी और दबाव बनाने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है। ट्रस्ट का आरोप है कि मंदिर की भूमि पर कब्जे की मंशा रखने वाले लोग कानूनी प्रक्रिया के बजाय भय का माहौल बनाकर अपने उद्देश्य को पूरा करने का प्रयास कर रहे हैं।

ट्रस्ट की ओर से मामले में पुलिस से शिकायत और सुरक्षा की मांग किए जाने की बात कही गई है। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक पुलिस की ओर से मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया था।


रिपोर्टर: ब्यूरो

टाइम्स ऑफ कुशीनगर

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