भीक्षाटन छोड़, शिक्षा की ओर बढ़ रहे नन्हें कदम, एवीआर दस्तक फाउंडेशन जगा रही उम्मीद की नई किरण

भीक्षाटन छोड़, शिक्षा की ओर बढ़ रहे नन्हें कदम, एवीआर दस्तक फाउंडेशन जगा रही उम्मीद की नई किरण

टाइम्स ऑफ कुशीनगर ब्यूरो

कुशीनगर। जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताबें और पेंसिल होनी चाहिए, उस उम्र में कई मासूम मजबूरीवश भीक्षाटन करने को विवश हैं। ऐसे बच्चों के जीवन में शिक्षा की रोशनी पहुंचाने का सराहनीय प्रयास एवीआर दस्तक फाउंडेशन द्वारा किया जा रहा है।

संस्था लगातार विभिन्न बस्तियों में पहुंचकर जरूरतमंद बच्चों को कॉपी, किताब, पेन और पेंसिल उपलब्ध करा रही है। साथ ही उन्हें भीक्षाटन छोड़कर शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। संस्था का मानना है कि यदि एक बच्चे के हाथ से कटोरा छूटकर किताब थाम ली जाए, तो उसका पूरा भविष्य बदल सकता है।

एमिटी विश्वविद्यालय, नोएडा से जैव प्रौद्योगिकी (बायोटेक्नोलॉजी) में बीटेक की छात्रा एवं एवीआर दस्तक फाउंडेशन में इंटर्नशिप कर रहीं सोनाली यादव प्रतिदिन बस्तियों में जाकर बच्चों को पढ़ाने का कार्य कर रही हैं। उनका उद्देश्य है कि कुशीनगर का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे और प्रत्येक बच्चे को अपने सपनों को साकार करने का अवसर मिले।

इस अवसर पर संस्था के संस्थापक एवं अध्यक्ष विकास श्रीवास्तव, सह-संस्थापक एवं लेखाकार कुमारी आलिया तथा सचिव रजनीश श्रीवास्तव उपस्थित रहे। वहीं संस्था में महिला सशक्तिकरण को नई दिशा देने का कार्य अमृता श्रीवास्तव द्वारा निरंतर किया जा रहा है।

संस्था के संस्थापक विकास श्रीवास्तव ने कहा,
"जब कोई बच्चा भीख मांगने के बजाय पढ़ाई करने लगता है, तो केवल उसका जीवन ही नहीं, बल्कि पूरे समाज का भविष्य भी बदल जाता है।"

एवीआर दस्तक फाउंडेशन का यह अभियान समाज के लिए एक प्रेरणादायक पहल है, जो यह संदेश देता है कि हर बच्चे का अधिकार शिक्षा है, भीक्षाटन नहीं।

संस्था ने समाज के सभी लोगों से अपील की है कि वे इस अभियान में सहयोग करें, ताकि हर बच्चे के हाथ में किताब हो और कोई भी मासूम अपना बचपन भीख मांगते हुए बिताने को मजबूर न हो।



रिपोर्टर: के एन राय 

टाइम्स ऑफ कुशीनगर

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