सेवरही बिजली विभाग में करोड़ों के खेल का आरोप, ट्रांसफार्मर गायब और भुगतान जारी!
बिजनेस प्लान, ओटीएस योजना और 70 लाख रुपये के भुगतान को लेकर उठे सवाल, ऊर्जा मंत्री तक पहुंची शिकायत
टाईम्स आफ कुशीनगर व्यूरो।
कुशीनगर। सेवरही विद्युत वितरण खंड में करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद बिजली विभाग सवालों के घेरे में आ गया है। आरोप ऐसे हैं जिन्होंने पूरे महकमे में हड़कंप मचा दिया है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि जहां धरातल पर कार्य दिखाई नहीं दे रहे हैं, वहां कागजों में विकास कार्य पूर्ण दिखाकर भुगतान कर दिया गया। ट्रांसफार्मर स्थापना, क्षमता वृद्धि, ओटीएस योजना और बिजनेस प्लान से जुड़े कार्यों को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।
आरोप है कि बिजनेस प्लान 2023-24 एवं 2024-25 के तहत करोड़ों रुपये की लागत से ट्रांसफार्मर स्थापना और क्षमता वृद्धि के कार्य स्वीकृत किए गए। विभागीय अभिलेखों में कार्य पूर्ण दर्शाए गए और भुगतान भी कर दिया गया, लेकिन कई स्थानों पर मौके पर ट्रांसफार्मर तक नहीं दिखाई पड़ रहे हैं। इससे कार्यों के सत्यापन, माप पुस्तिका और भुगतान प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं।
मामले में तत्कालीन अधिशासी अभियंता अरुण कुमार यादव के कार्यकाल को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि विभिन्न योजनाओं के नाम पर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। हालांकि इन आरोपों की अभी तक किसी सक्षम जांच एजेंसी द्वारा पुष्टि नहीं हुई है।
गरीब उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए संचालित एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस) भी सवालों के घेरे में है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि योजना के संचालन में पारदर्शिता नहीं बरती गई, जिससे विभागीय राजस्व और उपभोक्ताओं दोनों को नुकसान हुआ।
सबसे अधिक चर्चा उस भुगतान को लेकर है, जो संबंधित अधिकारी के स्थानांतरण के बाद भी किया गया। शिकायतकर्ताओं के अनुसार स्थानांतरण के बाद लगभग 70 लाख रुपये की धनराशि जारी की गई। इसे लेकर विभागीय प्रक्रिया और प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल उठ रहे हैं।
बताया जा रहा है कि पूरे मामले की शिकायत ऊर्जा मंत्री तक पहुंच चुकी है। इसके बाद विभागीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही हैं तो यह सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला हो सकता है और इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए।
अब निगाहें शासन और ऊर्जा विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं। लोग जानना चाहते हैं कि जिन कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च दिखाए गए, उनकी वास्तविक स्थिति क्या है और यदि अनियमितता हुई है तो जिम्मेदारों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी।
रिपोर्टर: व्यूरो।
टाइम्स ऑफ कुशीनगर

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