-10 वर्ष पूरे होने पर जिले के सीएचसी , पीएचसी और आयुष्मान आरोग्य मंदिर पर उत्सव की तरह मनाया गया पीएमएसए डे
टाइम्स ऑफ कुशीनगर
देवरिया।गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य व सुरक्षित प्रसव से सम्बंधित जन-उपयोगी योजना ''प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान'' (पीएमएसएमए) डे के 10 वर्ष होने पर जिले के प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और आयुष्मान आरोग्य मंदिर पर वृहद रुप से गर्भवतियों की जांच की गई। इस दौरान 105 हाई रिस्क प्रेगनेंसी (एचआरपी) वाली गर्भवतियां चिन्हित की गईं। इस महा-अभियान और उत्सव मनाया गया।
तरकुलवा ब्लॉक के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पीएमएसए डे का शुभारम्भ करते हुए सीएमओ डॉ अनिल कुमार गुप्ता ने कहा कि भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा राज्य स्वास्थ्य समिति, प्रदेश के निर्देश पर इस दिन जिला मुख्यालय स्थित मेडिकल कॉलेज से लेकर ब्लॉक स्तर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों , प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में व्यापक स्तर पर शिविर लगाए गए । इन शिविरों में गर्भवती महिलाओं को निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण प्रसव पूर्व जांच , स्वास्थ्य परामर्श तथा आवश्यक चिकित्सकीय सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग की तरफ से पूरी सेवाएं दी गईं है। इस विशेष आयोजन के संबंध में जानकारी देते हुए सीएमओ डॉ. अनिल कुमार गुप्ता ने बताया कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान की शुरुआत वर्ष 2016 में की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को हर महीने की 9 तारीख को गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध प्रसव पूर्व जांच सेवाएं उपलब्ध कराना था। इन विशेष शिविरों के अंतर्गत स्वास्थ्य केंद्रों पर आने वाली सभी गर्भवती महिलाओं की रक्तचाप (बीपी) जांच, वजन मापन, हीमोग्लोबिन जांच, मूत्र जांच तथा अन्य आवश्यक पैथोलॉजिकल टेस्ट पूरी तरह निःशुल्क किए गए । इसके साथ ही चिकित्सा अधिकारियों व सीएचओ द्वारा उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की विशेष पहचान की गईं और जरूरत के अनुसार उन्हें समय रहते बड़े स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर किया गया ।
आशा और एएनएम को सौंपी गई कमान
जिला मातृ स्वास्थ्य परामर्शदाता विश्वनाथ मल्ल ने बताया कि इस विशेष कार्यक्रम कि शत-प्रतिशत सफलता सुनिश्चित करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष मुस्तैदी बरती गई। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर कार्यरत सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों , एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं को विशेष रूप से शिविर का आयोजन किया गया। आशा कार्यकर्ताओं ने अपने-अपने क्षेत्रों में घर-घर जाकर पात्र गर्भवती महिलाओं, विशेषकर वैसी महिलाएं जो अब तक किसी वजह से जांच से वंचित रही हैं या उच्च जोखिम के दायरे में आती हैं, उनसे संपर्क कर प्रेरित कर उनकी जांच कराया ।
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