सांसद की चिट्ठी बेअसर, तरयासुजान में ‘गोमती’ पर अब भी रेलवे का ब्रेक — 40 गांवों की उम्मीदें अधर में

टाइम्स ऑफ कुशीनगर ब्यूरो  कुशीनगर। जिले के अंतिम छोर पर स्थित तरयासुजान क्षेत्र की जनता आज भी रेलवे विभाग की उदासीनता का दंश झेल रही है। छपरा-गोमती एक्सप्रेस के ठहराव की मांग को लेकर स्थानीय लोगों ने जुलूस, हस्ताक्षर अभियान और कई बार जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई, लेकिन छह महीने बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, देवरिया के सांसद शशांक मणि त्रिपाठी ने भी इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए रेल मंत्रालय को पत्र लिखा था, इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि रेलवे विभाग जनता की जरूरतों को नजरअंदाज कर केवल फाइलों में ही प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है।तरयासुजान स्टेशन से जुड़े करीब 40 गांवों के लोगों के लिए यह ट्रेन ठहराव सिर्फ सुविधा नहीं बल्कि जीवनरेखा साबित हो सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि ठहराव मिलने से मरीजों को लखनऊ इलाज के लिए जाने में बड़ी राहत मिलेगी, छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए आवागमन आसान होगा और नौकरीपेशा लोगों का समय व खर्च दोनों बचेगा।

ग्रामीणों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जब जनप्रतिनिधि स्तर से भी पत्राचार हो चुका है, तब भी कार्रवाई न होना प्रशासन की संवेदनहीनता को दर्शाता है। अब सवाल उठ रहा है कि आखिर जनता की मांग पूरी होने के लिए और कितने आंदोलन, ज्ञापन और अभियान की जरूरत पड़ेगी?स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। मोहम्मद वसीम बैजनाथ बेजू, अमित तिवारी, संतोष, दीनानाथ गुप्ता सहित कई लोगों ने लगातार धरना-प्रदर्शन और हस्ताक्षर अभियान चलाकर मांग को मजबूती दी है।



रिपोर्टर: ब्यूरो 

टाइम्स ऑफ कुशीनगर

खबर शेयर करें:

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ