तहसील का मोह: कुर्सी से चिपके लेखपाल राधेश्याम सिंह
बेटी-दामाद भी इसी तहसील में तैनात, आखिर किसके दम पर चल रहा पूरा खेल?
टाइम्स ऑफ कुशीनगर ब्यूरो, कुशीनगर।जनपद का कसया तहसील इन दिनों शासन के आदेशों से अधिक रसूखदारों की पकड़ के कारण चर्चा में बना हुआ है। तहसील में तैनात लेखपाल राधेश्याम सिंह को लेकर उठ रहे सवाल अब प्रशासनिक निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर रहे हैं। आरोप है कि स्थानांतरण आदेश जारी होने तथा कार्यमुक्त करने के स्पष्ट निर्देश के बावजूद राधेश्याम सिंह वर्षों से कसया तहसील में जमे हुए हैं।सूत्रों के अनुसार वर्ष 2025 में शासन स्तर से राधेश्याम सिंह का स्थानांतरण तहसील तमकुहीराज के लिए कर दिया गया था। अपर जिलाधिकारी द्वारा 25 जून 2025 को जारी आदेश में स्पष्ट उल्लेख किया गया था कि नवंबर 2025 तक उनका स्थानांतरण स्थगित रहेगा, जिसके बाद उन्हें हर हाल में कार्यमुक्त किया जाएगा। लेकिन नवंबर बीतने के कई महीने बाद भी वह कसया तहसील में ही तैनात बताए जा रहे हैं।
तहसील परिसर में यह भी चर्चा है कि परिवार की पकड़ और प्रभाव के चलते पूरे मामले को “प्रबंधित” कर लिया गया है। आरोप यहां तक लगाए जा रहे हैं कि प्रभावशाली लोगों के संरक्षण के कारण स्थानांतरण आदेश को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। यदि ऐसा है तो यह केवल एक कर्मचारी का मामला नहीं, बल्कि पूरी प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यशैली पर बड़ा सवाल है।
सामान्य कर्मचारियों को आदेश मिलते ही तत्काल कार्यमुक्त कर दिया जाता है, लेकिन इस मामले में अब तक कोई कार्रवाई न होना चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा है कि क्या शासन के नियम केवल कमजोर कर्मचारियों पर ही लागू होते हैं? क्या रसूखदारों के लिए अलग व्यवस्था है?
कसया तहसील में यह मामला अब आम चर्चा का विषय बन चुका है। लोगों का कहना है कि बिना राजनीतिक अथवा प्रशासनिक संरक्षण के कोई कर्मचारी स्थानांतरण के बाद इतने लंबे समय तक एक ही स्थान पर नहीं टिक सकता। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर राधेश्याम सिंह को संरक्षण कौन दे रहा है?
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेकर कोई कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी फाइलों तक सीमित रह जाएगा। सबसे चौंकाने वाली बात यह बताई जा रही है कि राधेश्याम सिंह अकेले नहीं, बल्कि उनकी बेटी और दामाद भी इसी तहसील में लेखपाल पद पर तैनात हैं। ऐसे में तहसील परिसर में यह चर्चा आम है कि पूरी व्यवस्था एक ही परिवार के प्रभाव में संचालित हो रही है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर किस नियम के तहत एक ही परिवार के तीन सदस्य वर्षों से एक ही तहसील में तैनात हैं।
रिपोर्टर: अजय कुमार त्रिपाठी
टाइम्स ऑफ कुशीनगर

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