घटना के बाद जागा प्रशासन! महिला की हालत बिगड़ने पर सील हुआ
मुन्ना पाली क्लिनिक बिना मानक वर्षों से चलता रहा अस्पताल, आखिर जिम्मेदार कौन?
टाइम्स ऑफ कुशीनगर ब्यूरो,
कुशीनगर।पडरौना कोतवाली क्षेत्र के खिरकिया में संचालित मुन्ना पाली क्लिनिक पर प्रशासन की कार्रवाई ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि अस्पताल में मानकों की कमी, विशेषज्ञ चिकित्सकों का अभाव और दस्तावेजों में अनियमितता थी, तो आखिर यह क्लिनिक अब तक किसकी निगरानी में संचालित होता रहा?महिला की हालत गंभीर होने के बाद प्रशासन ने अस्पताल को सील कर अपनी कार्रवाई पूरी कर ली, लेकिन इलाके के लोगों में चर्चा इस बात को लेकर है कि यदि समय रहते जांच और कार्रवाई हुई होती तो शायद किसी मरीज की जान जोखिम में न पड़ती।
जानकारी के अनुसार बिहार के पश्चिमी चंपारण जनपद निवासी अर्जुन शाह अपनी पत्नी सीमा देवी को इलाज के लिए खिरकिया स्थित मुन्ना पाली क्लिनिक लेकर पहुंचे थे। प्रसव के बाद महिला को अत्यधिक रक्तस्राव हो रहा था। आरोप है कि क्लिनिक में गलत इलाज और लापरवाही के कारण महिला की हालत लगातार बिगड़ती चली गई। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने स्थिति की गंभीरता छिपाई और समय रहते किसी बड़े अस्पताल में रेफर नहीं किया। मामला बढ़ने और शिकायत प्रशासन तक पहुंचने के बाद तहसीलदार अभिषेक मिश्रा एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची। जांच में कई गंभीर खामियां सामने आईं।सूत्रों के अनुसार क्लिनिक का पंजीकरण आयुर्वेद पद्धति के नाम पर था, जबकि वहां अन्य प्रकार का उपचार किया जा रहा था। जांच के दौरान जरूरी अभिलेख, प्रशिक्षित चिकित्सक और स्वास्थ्य मानकों से जुड़ी व्यवस्थाएं भी संतोषजनक नहीं मिलीं। इसके बाद प्रशासन ने अस्पताल को सील कर दिया।
हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में ऐसे कई कथित अस्पताल लंबे समय से खुलेआम संचालित हो रहे हैं। सवाल यह उठ रहा है कि क्या स्वास्थ्य विभाग को इनकी जानकारी नहीं थी, या फिर सब कुछ जानने के बावजूद कार्रवाई नहीं की जा रही थी।
ग्रामीणों का आरोप है कि गरीब और अशिक्षित लोग इलाज के नाम पर ऐसे अस्पतालों के भरोसे अपनी जिंदगी दांव पर लगाने को मजबूर हैं। घटना के बाद अब लोग स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं।
फिलहाल प्रशासन जांच की बात कह रहा है, लेकिन लोगों के बीच यह चर्चा तेज है कि यदि समय रहते कार्रवाई होती तो शायद यह स्थिति पैदा ही नहीं होती।
रिपोर्टर:अजय कुमार त्रिपाठी
टाइम्स ऑफ कुशीनगर
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