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कप्तानगंज में भड़क उठा पट्टा विवाद


▪️मछुआरों ने तहसीलदार पर सत्ता के दबाव में अनियमितता का लगाया आरोप

▪️डीएम कार्यालय पर फूटा मछुआरों का गुस्सा

🔴 टाइम्स ऑफ़ कुशीनगर ब्यूरो,

कुशीनगर। जनपद की कप्तानगंज तहसील इन दिनों तालाब-पोखरों के पट्टा आवंटन को लेकर उठे विवाद के कारण चर्चा के केंद्र में है। मत्स्यजीवी सहकारी समिति गंभीरपुर के सदस्यों ने तहसील प्रशासन पर सत्ता के दबाव में नियमों को ताक पर रखकर पट्टा आवंटन करने का गंभीर आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी कार्यालय पर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन कर रहे मछुआरों का आरोप है कि शासन के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अनुसार समिति क्षेत्र में आने वाले तालाब, पोखरे एवं अन्य जलस्रोतों का पट्टा स्थानीय मत्स्यजीवी सहकारी समिति को दिया जाना चाहिए था, लेकिन कप्तानगंज तहसीलदार ने नियमों की अनदेखी करते हुए पट्टा दूसरी समिति के नाम आवंटित कर दिया। आरोप है कि इस प्रक्रिया के पीछे प्रदेश के मत्स्य मंत्री डॉ. संजय निषाद के कथित रिश्तेदारों का प्रभाव रहा।

कप्तानगंज में भड़क उठा पट्टा विवाद

मछुआरों का कहना है कि यह केवल प्रशासनिक त्रुटि नहीं, बल्कि सत्ता के संरक्षण में किया गया सुनियोजित “पट्टा लूट कांड” है। वर्षों से जिन जलस्रोतों पर उनकी आजीविका निर्भर रही है, उन्हीं से उन्हें बेदखल करने का प्रयास किया जा रहा है। गरीब और मेहनतकश मछुआरे रोजी-रोटी के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जबकि प्रभावशाली लोग राजनीतिक पहुंच के बल पर सरकारी संपत्तियों पर कब्जा जमा रहे हैं।

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि यदि पट्टा आवंटन प्रक्रिया पारदर्शी होती तो उन्हें जिलाधिकारी कार्यालय पर धरना देने की आवश्यकता नहीं पड़ती। उनका कहना है कि कप्तानगंज तहसील में पट्टा व्यवस्था नियमों से नहीं, बल्कि राजनीतिक सिफारिशों के आधार पर संचालित हो रही है, जिससे शासन और प्रशासन की छवि धूमिल हो रही है।

धरने का नेतृत्व कर रहे मोनू निषाद ने आरोप लगाया कि योगी सरकार के मंत्री और निषाद समाज के कथित रहनुमा कहलाने वाले संजय निषाद अपने रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से निषाद समाज के ही लोगों का शोषण कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने शीघ्र निष्पक्ष जांच कर अवैध पट्टा निरस्त नहीं किया और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की, तो आंदोलन को सड़क से सदन तक ले जाया जाएगा।

प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, अवैध रूप से किए गए पट्टा आवंटन को तत्काल निरस्त करने, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करने तथा नियमों के अनुरूप गंभीरपुर मत्स्यजीवी सहकारी समिति को पट्टा दिए जाने की मांग की।


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