आयुष्मान कार्ड में फर्जीवाड़े और महिला की मौत के मामले में मुकदमा दर्ज करने का आदेश
कसया के लूना हॉस्पिटल पर गंभीर आरोप, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने थाना प्रभारी को दी जांच और कार्रवाई की जिम्मेदारी
टाइम्स ऑफ कुशीनगर ब्यूरो
कुशीनगर। कसया स्थित लूना हॉस्पिटल में आयुष्मान कार्ड के माध्यम से कथित फर्जीवाड़े, बिना सक्षम एनेस्थीसिया चिकित्सक और सर्जन की मौजूदगी में ऑपरेशन तथा उपचार के दौरान महिला की मौत के मामले में न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, कुशीनगर स्थान पडरौना ने प्रकरण में संबंधित धाराओं में अभियोग पंजीकृत कर विवेचना करने का आदेश थाना प्रभारी कसया को दिया है।
न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत प्रार्थना पत्र में मोहम्मद तसनीम कौसर ने आरोप लगाया कि 1 जून 2026 को उन्होंने अपनी पत्नी नर्गिस खातून को लूना हॉस्पिटल, कसया में उपचार के लिए भर्ती कराया था। आरोप के अनुसार अस्पताल के कर्मचारियों ने बताया कि ऑपरेशन अगले दिन होगा। 2 जून की सुबह ऑपरेशन की तैयारी की गई और अस्पताल कर्मियों द्वारा पत्नी को ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया।
प्रार्थी का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद करीब नौ बजे उसे बताया गया कि मरीज की हालत गंभीर है और उसे किसी दूसरे अस्पताल ले जाना पड़ेगा। परिजनों के अनुसार अस्पताल में मौजूद लोगों ने इलाज के संबंध में स्पष्ट जानकारी नहीं दी। बाद में महिला को एंबुलेंस से एनएच-28 स्थित माधव केयर सेंटर ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत बताया।
आरोप है कि इसके बाद महिला को गोरखपुर के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां भी चिकित्सकों ने उसकी पहले ही मौत हो जाने की बात कही। प्रार्थी का आरोप है कि जब वह पत्नी को वापस लूना हॉस्पिटल लेकर पहुंचा तो अस्पताल संचालक रिजवान आलम और अन्य जिम्मेदार लोग वहां मौजूद नहीं थे तथा घटना के संबंध में स्पष्ट जानकारी भी नहीं दी गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए महिला के शव का पोस्टमार्टम कराया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर चोट के निशान पाए जाने का भी उल्लेख प्रार्थना पत्र में किया गया है। इसके बाद प्रार्थी ने अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग तथा संबंधित चिकित्सकों और कर्मचारियों के मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल सुरक्षित कराए जाने की मांग की, ताकि घटना की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
आयुष्मान कार्ड को लेकर भी गंभीर आरोप
प्रार्थी ने आरोप लगाया कि उसकी पत्नी के इलाज के लिए अस्पताल कर्मियों ने आयुष्मान योजना की प्रक्रिया में उसकी पत्नी की वास्तविक पहचान और पारिवारिक विवरण के स्थान पर कथित तौर पर गलत तरीके से दूसरे परिवार की आईडी का इस्तेमाल किया। आरोप है कि आयुष्मान कार्ड के माध्यम से इलाज की रकम प्राप्त करने के लिए दस्तावेजों में हेरफेर किया गया।
मामले में प्रार्थी की ओर से पोस्टमार्टम रिपोर्ट, स्वास्थ्य विभाग को दिए गए प्रार्थना पत्र, आयुष्मान योजना से संबंधित संदेश तथा पुलिस को दिए गए शिकायती प्रार्थना पत्र समेत अन्य दस्तावेज न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए।
थाने में पहले दर्ज नहीं हुआ था मुकदमा
न्यायालय के आदेश में उल्लेख है कि प्रार्थना पत्र पर संबंधित थाना पुलिस से आख्या मंगाई गई थी। थाना हाजा की आख्या के अनुसार घटना के संबंध में कोई अभियोग पंजीकृत नहीं था।
इसके बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने प्रकरण के तथ्यों और प्रस्तुत दस्तावेजों पर विचार करते हुए थाना प्रभारी कसया को निर्देश दिया कि प्रार्थना पत्र के परिप्रेक्ष्य में सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत कर मामले की विवेचना की जाए और विवेचना के बाद न्यायालय को की गई कार्रवाई से अवगत कराया जाए।
न्यायालय ने विवेचक को सुप्रीम कोर्ट के Satendra Kumar Antil बनाम CBI एवं अन्य मामले तथा इलाहाबाद हाईकोर्ट के संबंधित निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया है।
अब पुलिस जांच में खुलेगा पूरा मामला
न्यायालय के आदेश के बाद अब पुलिस की विवेचना में यह स्पष्ट होना है कि महिला के इलाज के दौरान वास्तव में क्या हुआ था, ऑपरेशन में कौन-कौन से चिकित्सक और कर्मचारी मौजूद थे, आवश्यक चिकित्सा योग्यता एवं अनुमति का पालन हुआ था या नहीं तथा आयुष्मान योजना के दस्तावेजों में किसी प्रकार की अनियमितता की गई थी या नहीं।
साथ ही पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट, अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज, चिकित्सकीय दस्तावेज, आयुष्मान योजना से जुड़े रिकॉर्ड और संबंधित लोगों के बयान के आधार पर मामले की जांच करेगी। आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
रिपोर्टर:अजय कुमार त्रिपाठी
टाइम्स ऑफ कुशीनगर

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