गोबर से बन रही स्वच्छ ऊर्जा, गांव की बढ़ रही आमदनी
प्लांट से तैयार बायोगैस पाइपलाइन के जरिए कंपोजिट विद्यालय पहुंचाई जा रही है। यहां करीब 170 बच्चों के लिए मिड-डे मील इसी स्वच्छ ऊर्जा से तैयार किया जा रहा है। विद्यालय की ओर से गैस के उपयोग के एवज में प्रतिदिन 80 रुपये का भुगतान ग्राम पंचायत को किया जाता है।
संयंत्र से निकलने वाली स्लरी से जैविक खाद तैयार कर किसानों को पांच से आठ रुपये प्रति किलोग्राम की दर से उपलब्ध कराई जा रही है। अब तक गैस की बिक्री से करीब 11,740 रुपये और जैविक खाद से 14,301 रुपये की आय हुई है। विभिन्न मदों को मिलाकर ग्राम पंचायत को करीब 46,241 रुपये की आय प्राप्त हो चुकी है।
प्लांट के संचालन के लिए स्थानीय स्तर पर ऑपरेटर तैनात किया गया है। गौशाला कर्मी गोबर संग्रहण और साफ-सफाई में सहयोग करते हैं। इससे रोजगार के अवसर भी पैदा हुए हैं।
ग्राम पंचायत की यह पहल गोबर को कचरे के बजाय संसाधन में बदलने के साथ स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, जैविक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रही है। पिपरा चंद्रभान का यह मॉडल अन्य ग्राम पंचायतों के लिए भी अनुकरणीय बन सकता है।
रिपोर्टर: ब्यूरो
टाइम्स ऑफ कुशीनगर

0 टिप्पणियाँ
टिप्पणी करने के लिए आप को धन्यबाद!
.................................TIMES OF KUSHINAGAR