संविधान की प्रस्तावना को लेकर सुनील शुक्ला ने रखे विचार
टाइम्स आँफ कुशीनगर ब्यूरो
महराजगंज। संविधान की मूल प्रस्तावना को लेकर एडवोकेट एवं पूर्व सांसद प्रत्याशी सुनील कुमार शुक्ला ने अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि 42वें संविधान संशोधन, 1976 में प्रस्तावना में 'समाजवादी', 'पंथनिरपेक्ष' और 'अखंडता' शब्द जोड़े गए थे। इनमें अखंडता और समाजवाद को लेकर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि पंथनिरपेक्षता को भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने में बाधक मानना उचित नहीं है। भारतीय सनातन परंपरा में विभिन्न मत-पंथों के प्रति सम्मान और सह-अस्तित्व की भावना रही है। उन्होंने कहा कि भारत की एकता और अखंडता ही देश की सुरक्षा और मजबूती का आधार है। संविधान की प्रस्तावना को राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा और राष्ट्रीय हित के संदर्भ में समझने की आवश्यकता है।
– सुनील कुमार शुक्ला, एडवोकेट, हाई कोर्ट इलाहाबाद
पूर्व सांसद प्रत्याशी, कुशीनगर लोकसभा क्षेत्र एवं नेशनल लीगल सेक्रेटरी, राष्ट्रीय मानवाधिकार एसोसिएशन
रिपोर्टर: ब्यूरो
टाइम्स ऑफ कुशीनगर
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