केवट ने भगवान श्रीराम के समक्ष मित्रता का आदर्श प्रस्तुत किया : अतुल पाराशर
टाइम्स ऑफ कुशीनगर ब्यूरो
कपरवार। चल रही नौ दिवसीय श्रीराम कथा में रविवार को कथा व्यास अतुल पाराशर ने भगवान श्रीराम और केवट प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। राम-केवट संवाद सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथा व्यास ने कहा कि भगवान श्रीराम के जीवन में जो भी भक्तिभाव से आता है, वह उनका हो जाता है। केवट की भक्ति, श्रद्धा और समर्पण समाज के सामने मित्रता और प्रेम का आदर्श प्रस्तुत करता है।उन्होंने बताया कि वनवास के दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता और भाई लक्ष्मण जब गंगा तट पर पहुंचे तो उन्हें नदी पार करनी थी। केवट ने प्रभु को नाव से गंगा पार कराने से पहले उनके चरण पखारने की इच्छा व्यक्त की। केवट ने कहा कि प्रभु के चरणों की धूल के स्पर्श से पत्थर भी नारी बन गया था। उसे डर है कि कहीं उनकी चरण धूल के स्पर्श से उसकी नाव भी नारी न बन जाए। केवट की सरल भक्ति और निश्छल प्रेम से भगवान श्रीराम प्रसन्न हुए और उसे अपने चरण धोने की अनुमति प्रदान की।
अतुल पाराशर ने कहा कि राम-केवट प्रसंग केवल भगवान और भक्त के संबंध को ही नहीं दर्शाता, बल्कि सच्चे प्रेम, विश्वास और मित्रता का संदेश भी देता है। जीवन की लंबी यात्रा में प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में केवट जैसा मित्र होना चाहिए, जो गरीबी और विपरीत परिस्थितियों में भी मित्रता का धर्म न भूले। सच्चा मित्र वही है, जो कठिन समय में भी परछाई की तरह साथ खड़ा रहे।
कथा के दौरान श्रद्धालुओं के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। कथा के अवसर पर लोकनाथ जायसवाल, फौजी बाबा, अमित मिश्रा, गोलू बाबा, रमेश मिश्रा और उमेश मद्धेशिया ने व्यास पीठ का पूजन-अर्चन कर आरती की। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
रिपोर्टर: पवन कुमार
टाइम्स ऑफ कुशीनगर
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