राष्ट्रीय साइबर अपराध से निपटने के लिए सरकार का बड़ा अभियान, 32.80 लाख शिकायतों में बचाए गए 11,158 करोड़ रुपये

राष्ट्रीय साइबर अपराध से निपटने के लिए सरकार का बड़ा अभियान, 32.80 लाख शिकायतों में बचाए गए 11,158 करोड़ रुपये

टाइम्स ऑफ कुशीनगर ब्यूरो

नई दिल्ली। देश में बढ़ते साइबर अपराधों से प्रभावी और समन्वित तरीके से निपटने के लिए केंद्र सरकार द्वारा व्यापक स्तर पर कदम उठाए जा रहे हैं। गृह मंत्रालय ने साइबर अपराधों की रोकथाम और जांच के लिए इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (आई4सी) को एक संबद्ध कार्यालय के रूप में स्थापित किया है। इसके तहत नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल शुरू किया गया है, जिसके माध्यम से नागरिक सभी प्रकार के साइबर अपराधों की शिकायत दर्ज करा सकते हैं। महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले साइबर अपराधों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।


वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की तत्काल रिपोर्टिंग और ठगी की रकम को अपराधियों तक पहुंचने से रोकने के लिए वर्ष 2021 में सिटीजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम शुरू किया गया था। इसके तहत 30 जून 2026 तक 32.80 लाख से अधिक शिकायतों में 11,158 करोड़ रुपये से अधिक की राशि बचाई गई है। साइबर ठगी की शिकायत दर्ज कराने के लिए 1930 टोल-फ्री हेल्पलाइन भी संचालित की जा रही है।

गृह मंत्रालय के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2025-26 के दौरान नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर साइबर धोखाधड़ी की 53,87,905 से अधिक शिकायतें दर्ज हुईं। इनमें 1,81,271 से अधिक मामलों में प्राथमिकी दर्ज की गई। इस दौरान 56,087 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की राशि रिपोर्ट की गई, जबकि 9,079 करोड़ रुपये से अधिक की रकम को ‘लियन’ के रूप में चिह्नित किया गया। वहीं 206 करोड़ रुपये से अधिक की राशि पीड़ितों को वापस की गई।


साइबर अपराध की शिकायतों को प्राथमिकी में बदलने, जांच, आरोपियों की गिरफ्तारी, आरोपपत्र दाखिल करने और शिकायतों के समाधान की जिम्मेदारी संबंधित राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों की है। यह कार्रवाई कानून के प्रावधानों के अनुसार की जाती है।

शिकायतों के निस्तारण में एकरूपता और कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए गृह मंत्रालय ने एनसीआरपी-सीएफसीएफआरएमएस के लिए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया जारी की है। इसके माध्यम से शिकायतों पर आगे की कार्रवाई, बैंकों के साथ समन्वय, शिकायतों का निस्तारण, लियन मार्किंग हटाने और ठगी की रकम वास्तविक हकदार को वापस दिलाने की प्रक्रिया को व्यवस्थित किया गया है।

अप्रैल 2026 से मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल और ग्रीवेंस रिड्रेसल मॉड्यूल भी शुरू किए गए हैं। मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल का उद्देश्य साइबर ठगी में गंवाई गई रकम को पीड़ितों को जल्द वापस दिलाना है, जबकि ग्रीवेंस रिड्रेसल मॉड्यूल बैंक खाते फ्रीज होने और रकम पर लियन मार्किंग से जुड़ी शिकायतों के समयबद्ध समाधान में मदद करता है।

सरकार साइबर ठगी की रकम को तत्काल रोकने के लिए साइबर अपराध रिपोर्टिंग प्रणाली और वित्तीय संस्थानों के बीच एपीआई एकीकरण के माध्यम से त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित कर रही है। इसके अलावा, आई4सी में साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर स्थापित किया गया है, जहां प्रमुख बैंक, वित्तीय संस्थान, भुगतान एग्रीगेटर, दूरसंचार सेवा प्रदाता, आईटी मध्यस्थ और राज्यों की कानून प्रवर्तन एजेंसियां मिलकर साइबर अपराधों पर कार्रवाई कर रही हैं।

साइबर अपराध से संबंधित आंकड़ों के आदान-प्रदान और विश्लेषण के लिए ‘समन्वय’ प्लेटफॉर्म विकसित किया गया है। यह विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज साइबर अपराधों में शामिल अपराधियों और घटनाओं के बीच अंतरराज्यीय संबंधों का विश्लेषण करने में मदद करता है। इसके ‘प्रतिबिंब’ मॉड्यूल के माध्यम से अपराधियों और साइबर अपराध से जुड़े बुनियादी ढांचे की लोकेशन को मानचित्र पर प्रदर्शित किया जाता है। इसके माध्यम से 29,837 से अधिक आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है और साइबर जांच सहायता के लिए 2,33,593 से अधिक अनुरोध प्राप्त हुए हैं।

आईटी अधिनियम की धारा 79(3)(बी) के तहत आईटी मध्यस्थों को नोटिस भेजने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए ‘सहयोग’ पोर्टल शुरू किया गया है। इसके माध्यम से गैरकानूनी गतिविधियों में इस्तेमाल की जा रही जानकारी, डेटा या संचार लिंक को हटाने अथवा उसकी पहुंच बंद करने की प्रक्रिया को आसान बनाया गया है।

आई4सी ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों के साथ मिलकर 10 सितंबर 2024 को साइबर अपराधियों से जुड़े पहचानकर्ताओं की जानकारी के लिए ‘सस्पेक्ट रजिस्ट्री’ शुरू की थी। 30 जून 2026 तक बैंकों से 30.48 लाख से अधिक संदिग्ध पहचान संबंधी आंकड़े और 32.08 लाख लेयर-1 म्यूल खातों की जानकारी प्राप्त हुई। इस डेटा को संबंधित संस्थाओं के साथ साझा किया गया और 25,698 करोड़ रुपये के लेन-देन को रोकने में मदद मिली।

साइबर अपराध के हॉटस्पॉट और अंतरराज्यीय मामलों वाले क्षेत्रों में समन्वय मजबूत करने के लिए सात संयुक्त साइबर समन्वय टीमें गठित की गई हैं। ये टीमें मेवात, जामताड़ा, अहमदाबाद, हैदराबाद, चंडीगढ़, विशाखापत्तनम और गुवाहाटी में काम कर रही हैं।

इसके अलावा गृह मंत्रालय का आई4सी नियमित रूप से ‘स्टेट कनेक्ट’, ‘थाना कनेक्ट’ और ‘पीयर लर्निंग’ सत्र आयोजित कर रहा है। इनका उद्देश्य राज्यों और पुलिस थानों के स्तर पर साइबर अपराध की जांच में बेहतर कार्यपद्धतियों को साझा करना तथा पुलिसकर्मियों की क्षमता बढ़ाना है।

जांच अधिकारियों को प्रारंभिक स्तर पर साइबर फोरेंसिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए नई दिल्ली और असम में नेशनल-डिजिटल इन्वेस्टीगेशन सपोर्ट सेंटर स्थापित किए गए हैं। 30 जून 2026 तक नई दिल्ली स्थित केंद्र द्वारा साइबर अपराध से जुड़े 14,064 से अधिक मामलों में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों को सहायता उपलब्ध कराई जा चुकी है।

महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध की रोकथाम योजना के तहत गृह मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 132.93 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता जारी की है। इस राशि का उपयोग साइबर फोरेंसिक-सह-प्रशिक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना, जूनियर साइबर कंसल्टेंट की नियुक्ति तथा पुलिसकर्मियों, सरकारी वकीलों और न्यायिक अधिकारियों को प्रशिक्षण देने के लिए किया जा रहा है।

देश के 33 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में साइबर फोरेंसिक-सह-प्रशिक्षण प्रयोगशालाएं शुरू की जा चुकी हैं। अब तक 24,600 से अधिक कानून प्रवर्तन कर्मियों, न्यायिक अधिकारियों और सरकारी वकीलों को साइबर अपराध की रोकथाम, जांच और फोरेंसिक से संबंधित प्रशिक्षण दिया गया है।

वर्तमान में देशभर में साइबर अपराधों की जांच में सहायता के लिए सात केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाएं और 28 राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाएं कार्यरत हैं। राज्य स्तरीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं में साइबर फोरेंसिक क्षमताओं को मजबूत करने के लिए 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सहायता भी प्रदान की गई है।

गृह राज्यमंत्री बंदी संजय कुमार ने राज्यसभा में पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।



रिपोर्टर: अजय कुमार त्रिपाठी

टाइम्स ऑफ कुशीनगर

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