नई तकनीकी सीड ड्रिल से धान की बुआई: न बेहन की झंझट, न मजदूरों की चिंता, किसानों के चेहरे पर खुशी
 सिड ड्रिल बनी किसानों की नई साथी, धान की खेती में आई नई क्रांति

टाइम्स ऑफ कुशीनगर ब्यूरों |
महराजगंज। कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक का प्रभाव अब गांवों तक स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। धान की खेती में किसानों को बेहन तैयार करने, रोपाई कराने और मजदूरों की व्यवस्था करने जैसी कई परेशानियों का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब नई तकनीकी सीड ड्रिल मशीन किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। इस मशीन से सीधे खेत में धान की बुआई की जा रही है, जिससे समय, श्रम और लागत तीनों में भारी बचत हो रही है।
किसानों का कहना है कि पहले धान की रोपाई के लिए बेहन तैयार करने में कई सप्ताह का समय लगता था। इसके बाद मजदूरों की व्यवस्था और बढ़ती मजदूरी दरें खेती की लागत को बढ़ा देती थीं। वहीं, सीड ड्रिल मशीन के माध्यम से सीधे खेत में बीज की बुआई होने से इन सभी समस्याओं से राहत मिल रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार सीड ड्रिल तकनीक से बीज समान दूरी पर और उचित गहराई में गिरते हैं, जिससे पौधों का विकास बेहतर होता है। इसके अलावा बीज की खपत भी कम होती है और फसल की पैदावार में वृद्धि की संभावना रहती है। मशीन से कम समय में अधिक क्षेत्र में बुआई संभव होने से किसानों को मौसम की अनिश्चितताओं से भी राहत मिलती है।
क्षेत्र के कई किसानों ने इस तकनीक को अपनाकर सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए हैं। किसानों का कहना है कि जहां पहले एक एकड़ धान की रोपाई में कई मजदूरों की जरूरत पड़ती थी, वहीं अब मशीन कुछ ही घंटों में कार्य पूरा कर देती है। इससे खेती की लागत में उल्लेखनीय कमी आई है।
कृषि विभाग भी किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि सीड ड्रिल तकनीक न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होगी 



रिपोर्टर: रणजीत मोदनवाल

टाइम्स ऑफ कुशीनगर

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