खाद पर ‘बैन’ से किसान बेहाल, पैदावार पर मंडराया संकट

एक हाथ में माला, दूसरे में भाला! खाद पर ‘बैन’ से किसान बेहाल, पैदावार पर मंडराया संकट 
*क्षेत्रफल के हिसाब से खाद वितरण पर उठे सवाल, किसानों ने कहा— जरूरत से कम उर्वरक मिलने से कैसे बढ़ेगा उत्पादन?*
टाइम्स आँफ कुशीनगर ब्यूरों
महराजगंज। खेती-किसानी के लिए जरूरी खाद की उपलब्धता पर लगाए गए प्रतिबंध और क्षेत्रफल के आधार पर सीमित वितरण की व्यवस्था किसानों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बनती जा रही है। किसानों का कहना है कि सरकार एक ओर कृषि उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आय दोगुनी करने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर खाद की आपूर्ति पर लगाए गए अंकुश से खेती प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है।


किसानों के अनुसार वर्तमान व्यवस्था में खेत के क्षेत्रफल के आधार पर खाद उपलब्ध कराई जा रही है, जबकि फसल की वास्तविक जरूरत, मिट्टी की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता को नजरअंदाज किया जा रहा है। ऐसे में कई किसानों को आवश्यकता से कम खाद मिल रही है, जिससे फसल उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
ग्रामीण क्षेत्रों में राधामण जैसवाल का कहना है कि यदि समय पर पर्याप्त मात्रा में खाद और बीज उपलब्ध नहीं होंगे तो बेहतर पैदावार की उम्मीद करना बेमानी होगा। खेती पूरी तरह मौसम और संसाधनों पर निर्भर करती है। ऐसे में उर्वरकों की कमी सीधे फसल की वृद्धि और उत्पादन को प्रभावित करेगी।
अन्य कई किसानों का आरोप है कि सरकार की नीतियों में विरोधाभास दिखाई दे रहा है। एक तरफ किसानों के हितैषी होने का दावा किया जा रहा है, तो दूसरी तरफ खाद वितरण पर ऐसी शर्तें लागू की जा रही हैं जो खेती को मुश्किल बना रही हैं। किसानों के बीच यह चर्चा भी आम है कि "सरकार एक हाथ में माला और दूसरा हाथ में भाला लिए हुए नजर आ रहा है"। एक ओर सहायता और प्रोत्साहन की बातें हैं, तो दूसरी ओर आवश्यक कृषि संसाधनों पर नियंत्रण।
कृषि जानकारों का मानना है कि यदि खाद की उपलब्ध नहीं नहीं हो पा रहा है।यहाँ अपनी खबर लिखना शुरू करें...

रिपोर्टर: रणजीत मोदनवाल

टाइम्स ऑफ कुशीनगर

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