विद्यालय केवल किताबी ज्ञान का केन्द्र नहीं, बल्कि समाज का लघु रूप है ---फणिन्द्र नाथ झा

टाइम्स ऑफ कुशीनगर संवाददाता
कसया (कुशीनगर)। कसया नगर स्थित महर्षि अरविन्द विद्या मन्दिर में आयोजित नवचयनित आचार्य प्रशिक्षण वर्ग के नवें दिन के कार्यक्रम का शुभारम्भ माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष पुष्पार्चन एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि फणिन्द्र नाथ झा जी सम्भाग निरीक्षक बस्ती सम्भाग , अध्यक्ष जियालाल प्रदेश निरीक्षक जन शिक्षा समिति गोरक्ष प्रदेश,दिवाकर राम त्रिपाठी तथा रणजीत उपाध्याय ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। कार्यक्रम का संचालन दिवाकर राम त्रिपाठी ने किया। इस अवसर पर अतिथियों का अंगवस्त्र एवं श्रीफल भेंट कर स्वागत किया गया l प्रशिक्षण वर्ग को सम्बोधित करतें हुए मुख्य अतिथि ने शिक्षा और समाज के अंतर्संबंधों पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि विद्यालय को केवल किताबी ज्ञान का केंद्र न मानकर "समाज का लघु रूप" स्वीकार किया जाना चाहिए।
​श्री झा ने कहा कि एक विद्यालय तभी सामाजिक चेतना का जीवंत केंद्र बन सकता है, जब वह अपनी चारदीवारी से बाहर निकलकर समाज के सुख-दुख, संस्कृति और ज्वलंत समस्याओं से सीधा जुड़ाव स्थापित करे।

​सामाजिक चेतना जगाने के लिए व्यावहारिक कदम
​व्याख्यान के दौरान मुख्य वक्ता ने विद्यालयों को समाज से जोड़ने के लिए निम्न प्रभावी कड़ियों को रेखांकित किया
​सामुदायिक सेवा और श्रमदान: छात्र किताबी ज्ञान से परे हटकर सामाजिक सरोकारों को समझें। इसके लिए नजदीकी क्षेत्रों में साक्षरता, स्वच्छता और स्वास्थ्य जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है।
​स्थानीय संस्कृति से जुड़ाव: क्षेत्रीय लोक कलाओं, शिल्पकारों और पारंपरिक उत्सवों को विद्यालय के मंच पर स्थान मिलना चाहिए, जिससे नई पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ी रहे। ​समस्याओं पर शोध विद्यार्थियों को स्थानीय समस्याओं (जैसे पर्यावरण, जल संरक्षण और यातायात) पर प्रोजेक्ट और सर्वे करने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए ताकि वे व्यावहारिक समाधान ढूंढ सकें।
संवेदनशीलता का विकास: छात्रों में सहानुभूति और मानवीय मूल्यों को जगाने के लिए उन्हें वृद्धश्रमों, अनाथालयों और सामाजिक संस्थाओं के नियमित भ्रमण पर ले जाया जाए।

​शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य
​संगोष्ठी के समापन पर मुख्य वक्ता फणीन्द्र झा ने कहा, "शिक्षा का अंतिम उद्देश्य केवल परीक्षा पास करना या डिग्री हासिल करना नहीं है, बल्कि एक संवेदनशील, जागरूक और उत्तरदायी नागरिक का निर्माण करना है। जब विद्यालय समाज की धड़कनों को महसूस करने लगेगा, तभी वह सही मायनों में सामाजिक चेतना का केंद्र बन पाएगा।"
​इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य, समस्त शिक्षक गण और प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे, जिन्होंने इस विचार को आधुनिक शिक्षा व्यवस्था के लिए अत्यंत प्रासंगिक बताया। कार्यक्रम में राजन राव, अमित राव, अमित तिवारी, दिवाकर राव, रोशनी शर्मा, ओमप्रकाश भारती, धर्मेन्द्र साहू, अरुण पाण्डेय, धीरज पाण्डेय, तपनारायण कुशवाहा सहित सभी नवचयनित प्रशिक्षु आचार्य एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे ।

रिपोर्टर: के एन राय 

टाइम्स ऑफ कुशीनगर

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