संतुलित उर्वरकों के प्रयोग पर जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

ग्राम खिरियामिश्र में फसलों में संतुलित उर्वरकों के प्रयोग पर जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

टाइम्स ऑफ कुशीनगर ब्यूरो
ललितपुर। बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, बांदा के अंतर्गत संचालित कृषि विज्ञान केन्द्र, ललितपुर द्वारा विकासखंड जखौरा के ग्राम खिरियामिश्र में “फसलों में उर्वरकों के संतुलित प्रयोग” विषय पर विशेष जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. मुकेश चंद ने की।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. मुकेश चंद ने किसानों से अपने खेतों की मिट्टी की जांच कराने तथा उसी के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मनुष्य के भोजन में सभी पोषक तत्वों का संतुलन आवश्यक होता है, उसी प्रकार फसलों के लिए भी सभी पोषक तत्वों की संतुलित मात्रा जरूरी है। उन्होंने बताया कि आवश्यकता से अधिक रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से खेती की लागत बढ़ती है तथा मिट्टी की उर्वरता क्षमता में गिरावट आती है।

उन्होंने किसानों को सलाह दी कि मृदा में पौधों के लिए आवश्यक 17 पोषक तत्वों जैसे नत्रजन, फास्फोरस, पोटाश, सल्फर, कैल्शियम और मैग्नीशियम आदि की पूर्ति संतुलित ढंग से की जानी चाहिए। इसके लिए डीएपी और यूरिया के सीमित प्रयोग के साथ-साथ पशुओं की सड़ी खाद, केंचुआ खाद, हरी खाद, नाडेप खाद, जैव उर्वरक, एनपीके और तरल उर्वरकों का भी उपयोग किया जाए।

कार्यक्रम में विषय वस्तु विशेषज्ञ सस्य विज्ञान एवं नोडल अधिकारी डॉ. दिनेश तिवारी ने किसानों को तकनीकी जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2025 के दौरान जनपद ललितपुर में आवश्यकता से अधिक डीएपी, टीएसपी और एमएपी उर्वरकों का लगभग 30073 मीट्रिक टन प्रयोग किया गया। उन्होंने कहा कि यूरिया और डीएपी के असंतुलित प्रयोग से मिट्टी में पोषक तत्वों का संतुलन बिगड़ता है, जिससे उर्वरता और उर्वरक उपयोग क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

उन्होंने किसानों को वैज्ञानिक संस्तुतियों एवं मृदा परीक्षण के आधार पर एनपीके कॉम्प्लेक्स और एसएसपी उर्वरकों के संतुलित उपयोग की सलाह दी। साथ ही हरी खाद, जैव उर्वरक, गोबर की सड़ी खाद, केंचुआ खाद और सूक्ष्म पोषक तत्वों के उपयोग से अधिक उत्पादन प्राप्त करने की जानकारी दी।

कार्यक्रम के दौरान किसानों को पशुओं के गोबर, मूत्र, बिछावन एवं चारा अवशेषों से गुणवत्तायुक्त जैविक खाद तैयार करने के लिए भी प्रेरित किया गया। साथ ही जैविक एवं प्राकृतिक खेती को अपनाने पर जोर दिया गया।

विषय वस्तु विशेषज्ञ गृह विज्ञान डॉ. सरिता देवी ने कृषकों एवं कृषक महिलाओं को स्वस्थ जीवन के लिए जैविक एवं प्राकृतिक विधि से गृह वाटिका और पोषण वाटिका विकसित कर सब्जियों का उत्पादन करने के लिए प्रेरित किया कार्यक्रम में घासीराम, घनश्याम, रामसखी, संगीता सहित 30 से अधिक कृषकों एवं कृषक महिलाओं ने प्रतिभाग किया।

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