डुमरिया मठ विवाद गहराया: कागजों में 48 डिसमिल कब्रिस्तान, मौके पर 100 डिसमिल जमीन पर कब्जे का आरोप,
टाइम्स ऑफ़ कुशीनगर ब्यूरो
कुशीनगर। यूपी–बिहार सीमा पर स्थित ऐतिहासिक डुमरिया मठ एक बार फिर जमीन विवाद को लेकर सुर्खियों में है। मामला धार्मिक आस्था और सरकारी अभिलेखों में कथित हेराफेरी से जुड़ा होने के कारण प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।मठ के महंथ रूद्रानंद गिरी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि गांव में कब्रिस्तान की जमीन सरकारी रिकॉर्ड में केवल 48 डिसमिल दर्ज है, जबकि मौके पर लगभग 100 डिसमिल भूमि पर कब्जा किया गया है। उनका कहना है कि यह मामला केवल भूमि विवाद नहीं, बल्कि दस्तावेजों में हेराफेरी कर धार्मिक संपत्तियों को प्रभावित करने का प्रयास है।
महंथ ने आरोप लगाया कि डुमरिया मठ की जमीन के अभिलेखों में लंबे समय से छेड़छाड़ की जा रही है, जिससे वास्तविक स्थिति को बदलने की कोशिश की गई है। इस मामले को उन्होंने हाईकोर्ट तक पहुंचाया है, जहां प्रकरण वर्तमान में विचाराधीन है।मामले की गंभीरता को देखते हुए मंडलायुक्त गोरखपुर के निर्देश पर जिलाधिकारी कुशीनगर ने जांच के आदेश दिए थे, लेकिन आरोप है कि जांच की फाइल पिछले कई महीनों से तहसीलदार तमकुहीराज कार्यालय में लंबित पड़ी हुई है, जिससे जांच प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है।
स्थानीय लोगों में भी इस मामले को लेकर चर्चा तेज है कि आखिर इतने संवेदनशील प्रकरण में कार्रवाई क्यों रुकी हुई है। मठ पक्ष का आरोप है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो स्थिति और अधिक जटिल हो सकती है।यह विवाद अब सामाजिक और राजनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय बन गया है। लोगों का कहना है कि यदि जमीन और राजस्व अभिलेखों की निष्पक्ष जांच की जाए तो कई बड़े तथ्य सामने आ सकते हैं। फिलहाल सभी की नजर प्रशासन और न्यायालय की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।
रिपोर्टर: अजय त्रिपाठी
टाइम्स ऑफ कुशीनगर


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