डीजल की मार, सूखी नहरें और टूटती उम्मीदें

आखिर कैसे बचेगी खेती, कैसे भरेगा देश का पेट
बेहन से पहले ही किसानों की टूटी कमर, खेती पर तिहरा संकट


टाइम्स ऑफ कुशीनगर ब्यूरो | 

महराजगंज। देश का अन्नदाता इस समय गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। लगातार बढ़ती डीजल कीमतें, सूखी नहरें और खेती की बढ़ती लागत ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। धान की बेहन (नर्सरी) डालने का समय शुरू हो चुका है, लेकिन खेतों तक पानी न पहुंचने और सिंचाई खर्च बढ़ने से किसान परेशान नजर आ रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में कई किसानों ने खेतों की जुताई तो करा ली है, लेकिन आगे की तैयारी अधर में लटकी हुई है। डीजल महंगा होने से ट्रैक्टर, पंपिंग सेट और सिंचाई का खर्च काफी बढ़ गया है। किसानों का कहना है कि पहले से ही खाद, बीज और मजदूरी महंगी थी, ऊपर से ईंधन की कीमतों ने खेती को और मुश्किल बना दिया है।

सूखी नहरों ने बढ़ाई परेशानी
किसानों की उम्मीद नहरों के पानी पर टिकी थी, लेकिन समय पर नहरों में पानी नहीं पहुंचने से खेत सूखे पड़े हैं। धान की बेहन और आगामी रोपाई की तैयारी प्रभावित हो रही है। किसानों का कहना है कि अगर नहरों में समय से पानी छोड़ा जाता तो सिंचाई लागत कम होती और खेती का काम सुचारु रूप से आगे बढ़ता।अब कई किसान निजी संसाधनों से सिंचाई करने को मजबूर हैं, जिससे लागत लगातार बढ़ रही है। छोटे और सीमांत किसानों पर इसका सबसे अधिक असर पड़ रहा है।
“खेती प्रभावित हुई तो खाद्यान्न उत्पादन पर पड़ेगा असर”
ग्रामीण इलाकों में किसान खुलकर अपनी चिंता जाहिर कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि समय पर धान की बेहन और रोपाई नहीं हो पाई तो उत्पादन प्रभावित हो सकता है। खेती कमजोर हुई तो आने वाले समय में खाद्यान्न संकट की आशंका भी बढ़ सकती है। किसानों का सवाल है कि जब अन्नदाता ही संकट में होगा तो देश की खाद्य व्यवस्था कैसे मजबूत रहेगी?
सरकारी दावे बनाम जमीनी हकीकत
सरकार की ओर से किसानों को राहत और सिंचाई व्यवस्था मजबूत करने के दावे किए जाते हैं, लेकिन कई ग्रामीण क्षेत्रों में किसान अब भी पानी और बढ़ती लागत जैसी मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर खेती-किसानी से जुड़ी चुनौतियों का स्थायी समाधान कब निकलेगा।
किसानों की मांग है कि नहरों में तत्काल पानी छोड़ा जाए, डीजल कीमतों पर राहत मिले और खेती की लागत कम करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं, ताकि समय पर खेती हो सके और उत्पादन प्रभावित न हो।



रिपोर्टर: रणजीत मोदनवाल

टाइम्स ऑफ कुशीनगर

खबर शेयर करें:

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ