फसल अवशेष न जलाने की अपील, उल्लंघन पर लगेगा जुर्माना

 फसल अवशेष न जलाने की अपील, उल्लंघन पर लगेगा जुर्माना

टाईम्स आफ कुशीनगर व्यूरो

कुशीनगर ।कुशीनगर जनपद के किसानों से फसल अवशेष न जलाने की अपील की गई है। “फसल अवशेष न जलाएँ, पर्यावरण बचाएँ – मृदा स्वास्थ्य बढ़ाएँ, समृद्ध खेती अपनाएँ” संदेश के साथ उप निदेशक कृषि अतिन्द्र सिंह ने कहा कि फसल अवशेष जलाने से पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता है और मृदा की उर्वरता पर गंभीर प्रभाव पड़ता है।

उन्होंने बताया कि अवशेष जलाने से मृदा के पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं तथा इसके भौतिक, रासायनिक और जैविक गुण प्रभावित होते हैं। साथ ही लाभकारी सूक्ष्म जीव और मित्र कीट भी नष्ट हो जाते हैं, जिससे उत्पादन क्षमता घटती है। इससे निकलने वाला धुआँ व हानिकारक गैसें वायु गुणवत्ता को खराब करती हैं, जिससे आंखों में जलन, त्वचा रोग, श्वसन एवं हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ता है।


किसानों को सलाह दी गई है कि वे फसल अवशेष प्रबंधन यंत्रों का उपयोग कर अवशेषों को मिट्टी में मिलाकर खाद के रूप में परिवर्तित करें। साथ ही अवशेषों को निराश्रित गौ आश्रय स्थलों में दान कर पशुओं के चारे एवं बिछावन के रूप में भी उपयोग किया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि कंबाइन हार्वेस्टर से कटाई के बाद सुपर स्ट्रॉ प्रबंधन प्रणाली, हैप्पी सीडर, जीरो टिल सीड ड्रिल, मल्चर, श्रेडर, रोटरी स्लेशर, बेलिंग मशीन सहित विभिन्न यंत्रों का उपयोग किया जाना चाहिए। ये यंत्र जनपद में स्थापित कस्टम हायरिंग सेंटर एवं फार्म मशीनरी बैंक से किराये पर उपलब्ध हैं।

उप निदेशक कृषि ने चेतावनी दी कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण एवं उच्चतम न्यायालय के निर्देशानुसार फसल अवशेष जलाना दंडनीय है और इसकी निगरानी सेटेलाइट के माध्यम से की जा रही है। नियमों का उल्लंघन करने पर 2 एकड़ से कम भूमि पर ₹2500, 2 से 5 एकड़ तक ₹5000 तथा 5 एकड़ से अधिक भूमि पर ₹15000 प्रति घटना जुर्माना लगाया जाएगा। उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे फसल अवशेष न जलाकर उसका समुचित प्रबंधन करें, कम्पोस्ट तैयार करें और सतत कृषि को बढ़ावा दें।

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