स्वच्छता के नाम पर लाखों का खेल! एक ही फर्म से कीटनाशक से लेकर सीमेंट-पाइप तक खरीद का आरोप
ग्राम भिस्वा में फर्जी बिल भुगतान और सरकारी धन के दुरुपयोग की शिकायत, डीएम से उच्चस्तरीय जांच की मांग
टाइम्स ऑफ कुशीनगर ब्यूरो
महराजगंज। विकासखंड सदर की ग्राम सभा भिस्वा में स्वच्छता मद की धनराशि के कथित दुरुपयोग, संदिग्ध खरीद और फर्जी बिल भुगतान को लेकर शिकायत सामने आई है। ग्राम निवासी आलोक रंजन गुप्ता ने जिलाधिकारी को 4 अप्रैल 2026 को प्रार्थना पत्र देकर मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। शिकायतकर्ता का कहना है कि प्रार्थना पत्र दिए जाने के बावजूद अभी तक उन्हें कोई जवाब नहीं मिला है।
शिकायतकर्ता के आरोपों के अनुसार, ग्राम सभा में जीपी इंटरप्राइजेज एंड ऑर्डर सप्लायर, पड़री, विकासखंड मिठौरा नामक फर्म से कीटनाशक दवाओं की खरीद दर्शाई गई है। आरोप है कि संबंधित फर्म के पास कीटनाशक बिक्री का वैध लाइसेंस नहीं होने के बावजूद उससे खरीदारी की गई। शिकायतकर्ता ने इस पूरी खरीद प्रक्रिया में ग्राम प्रधान और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की है।
एक ही फर्म से अलग-अलग सामान खरीदने का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि एक ही फर्म से सीमेंट, पाइप, हार्डवेयर और अन्य विभिन्न प्रकार की सामग्रियों की खरीद दर्शाई गई है। शिकायतकर्ता के मुताबिक संबंधित फर्म ग्राम सभा क्षेत्र में स्थित भी नहीं है। इसके बावजूद अलग-अलग श्रेणी की सामग्रियों की खरीद उसी फर्म से दिखाए जाने पर सवाल उठ रहे हैं।
शिकायतकर्ता ने आशंका जताई है कि कागजी बिल तैयार कर सरकारी धन का भुगतान किया गया हो सकता है। हालांकि इन आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
स्वच्छता मद में लाखों की निकासी पर उठे सवाल
सबसे गंभीर सवाल अक्टूबर 2025 में स्वच्छता मद से कई लाख रुपये की कथित निकासी को लेकर उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि अभिलेखों में सफाई कार्य और विभिन्न सामग्रियों की खरीद दर्शाई गई, लेकिन मौके पर न तो पर्याप्त सफाई कार्य दिखाई देता है और न ही संबंधित सामग्री अथवा संसाधनों के वास्तविक उपयोग की स्थिति स्पष्ट है।
शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी से मांग की है कि ग्राम सभा के स्वच्छता मद से हुए सभी भुगतानों, खरीद संबंधी अभिलेखों, बिल-वाउचर, संबंधित फर्म के दस्तावेजों और मौके पर कराए गए कार्यों की जांच कराई जाए। साथ ही ग्राम प्रधान एवं संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
जांच के बाद सामने आएगी वास्तविकता
मामले में लगाए गए आरोप फिलहाल शिकायतकर्ता के दावे हैं। इनकी पुष्टि संबंधित विभागीय जांच और अभिलेखों के सत्यापन के बाद ही हो सकेगी। अब देखना यह है कि जिलाधिकारी स्तर से इस शिकायत पर कब जांच शुरू होती है और जांच में स्वच्छता मद से हुए खर्च तथा खरीद प्रक्रिया की वास्तविक स्थिति क्या सामने आती है।
रिपोर्टर: रणजीत मोदनवाल
टाइम्स ऑफ कुशीनगर

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