“गेट पर खड़े शिक्षक, ताले में कैद पढ़ाई!”

🔴 हाल ए पावनगर इंटर कॉलेज फाजिलनगर फाजिलनगर 

टाइम्स ऑफ़ कुशीनगर ब्यूरो

फाजिलनगर (कुशीनगर)। फाजिलनगर स्थित पावा नगर महावीर इंटर कॉलेज एक बार फिर अव्यवस्था का प्रतीक बनकर सुर्खियों में है। मीडिया में लगातार खबरें आने के बावजूद हालात जस के तस हैं—न समय का पालन, न जिम्मेदारी का एहसास। सबसे बड़ा खामियाजा भुगत रहे हैं छात्र, जिनकी पढ़ाई रोज ताले में कैद हो रही है।

कुशीनगर के तमकुहीराज क्षेत्र में मठ की बेशकीमती जमीन को लेकर विवाद गहरा गया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें:

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बृहस्पतिवार की सुबह फिर वही तस्वीर सामने आई। शिक्षक समय से विद्यालय पहुंचे, लेकिन मुख्य गेट बंद मिला। करीब एक घंटे तक शिक्षक बाहर खड़े इंतजार करते रहे, तब जाकर सुबह लगभग 8:30 बजे विद्यालय का ताला खुला। सवाल यह है कि जब शिक्षक ही गेट के बाहर खड़े रहें, तो अंदर पढ़ाई कैसे होगी?

शिक्षकों का कहना है कि यह कोई एक दिन की बात नहीं, बल्कि रोज का हाल बन चुका है। “यहां सब कुछ ‘आदेश’ पर चलता है, समय पर नहीं,” एक शिक्षक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया। उनका आरोप है कि प्रबंधन पूरी तरह मनमानी पर उतर आया है और किसी को जवाबदेही की परवाह नहीं है।

मामले को और गंभीर बनाते हुए शिक्षकों ने आरोप लगाया कि उन पर छात्रों से अधिक शुल्क वसूलने का दबाव बनाया जा रहा है। “ऊपर तक सेटिंग” के नाम पर दबाव डालकर नियमों को ताक पर रखा जा रहा है। इससे न केवल शिक्षा का माहौल बिगड़ रहा है, बल्कि शिक्षकों में भी असंतोष बढ़ता जा रहा है।

सावधान: कीटनाशी विक्रेताओं के लिए IMPS पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य, 18 अप्रैल अंतिम तिथि

कुशीनगर जिला कृषि अधिकारी डॉ. मेनका के अनुसार, सभी कीटनाशी विक्रेताओं को 18 अप्रैल तक अपना ऑनलाइन पंजीकरण पूरा करना होगा। ऐसा न करने पर लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी। पूरी जानकारी के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें:

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स्थानीय लोगों का कहना है कि जब विद्यालय समय पर नहीं खुलता, तो छात्र इधर-उधर भटकते नजर आते हैं। इससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है और अभिभावकों में भी आक्रोश है।

अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर जिम्मेदार कब जागेंगे? क्या ऐसे ही छात्रों का भविष्य ताले में बंद रहेगा?

शिक्षकों और स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि विद्यालय की व्यवस्था पटरी पर लौट सके और छात्रों को उनका हक—समय पर शिक्षा—मिल सके।

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