कुशीनगर में पढ़ने के बजाय 274 बच्चे ढ़ोते है मैला

टाइम्स  कुशीनगर ब्यूरो 
कुशीनगर  । शिक्षा का अधिकार के बावजूद कुशीनगर में 6 से 14 बर्ष के प्रत्येक बच्चे को शिक्षा नही मिल पा रही है। ऐसे में शिक्षा से बंचित 274 ऐसे बच्चें है जो मैला ढ़ोने का कार्य करते है।

इस बात का खुलाशा मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय के अनुसचिव मंजीत कुमार के निर्देश पर सहायक जनसूचना अधिकारी अरविन्द कुमार कुरील ने लिखित तौर पर समशेर मल्ल नाम के एक व्यक्ति द्वारा जन सूचना अधिनियम के तहत मांगी गयी एक सूचना में किया है।

जिसमें बताया गया है कि निदेशक स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग मानव संसाधन विकास मंत्रालय भारत सरकार द्वारा वर्ष 2011 के जनगणना में चिन्हित ड्राई लेटरीन वाले हाउस होल्ड की संख्या उपलब्ध कराते हुए मैला ढोने की प्रथा में संलिप्त परिवारों की संख्या उपलब्ध करायी गयी है। उक्त के आधार पर जनपदों को ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के ड्राई लेटरीन वाले हाउस होल्ड का विवरण जनसंख्या कार्यालय से प्राप्त कर उक्त हाउस होल्ड से सम्पर्क स्थापित करने के उपरान्त उन परिवार के बच्चों की विद्यालय जाने की स्थिति ज्ञात कर विद्यालय न जाने की स्थिति में उन्हे विद्यालयों में नामांकित कराने के निर्देश राज्य परियोजना कार्यालय द्वारा दिये गये है।
 
जिसमें गोरखपुर एवं बस्ती मंडल के बस्ती जिले में 189, संतकबीरनगर में 53, सिद्धार्थनगर में 99, गोरखपुर में 292, कुशीनगर में 274, महराजगंज में 120 तथा देवरिया में 77 बच्चे समेत कुल 1104 बच्चे सरकारी विद्यालयों में नामांकित न होकर मैला ढोने का काम कर रहे है बताया गया है।
 
इस बावत जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रदीप कुमार पाण्डेय ने राज्य परियोजना कार्यालय की इस रिपोर्ट पर चिन्ता जताया है और कहा है कि मैला ढोने वाले बच्चों की तादात बढ़ने के पहलूओं का अध्ययन कर इसके रोकथाम के लिए विभाग द्वारा हर संभव प्रयास जारी है।

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