कुशीनगर में विना काम के हो जाता है भुगतान


कुशीनगर । उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में ऐसे कई क्षेत्र है जहां बिन काम किये भुगतान ले लिया जाता है। ऐसे क्षेत्रा में पडरौन मडूरही नाम का गांव भी है जहां प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत निर्माण दिखाकर लाखों रुपये डकार लिया गया।यही नही इसके कारिन्दे कागज में इसकी मरम्मत दिखा रहे है। जबकि वास्तविकता यह आज भी सड़क खड़ंजा ही है।

कुशीनगर जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोंमीटर की दूरी पर स्थित यह सड़क दुदही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से चटंगवा गांव तक जाती है। 1.73 किलोमीटर लंबी सड़क को प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत बनवाने के लिए कार्यदायी संस्था की ओर से बोर्ड लगवाया गया है।
बोर्ड पर दर्शाया गया है कि यह सड़क बनवाने के लिए ग्रामीण अभियंत्रण विभाग पीआईयू-01 कसया ने जयश्री कंस्ट्रक्शन एन-165ए नगवा लका वाराणसी को कार्य सौंपा है। उस पर सड़क निर्माण प्रारंभ करने की तिथि 26.082011 और पूर्ण करने की 25.08.2012 दर्शाई गई है। सड़क बनवाने की लागत 76.02 लाख रुपये तथा मरम्मत की धनराशि 3.50 लाख रुपये लिखी गई है। मरम्मत की तारीख 26.08.2012 से 25.08.17 तक निश्चित की गई है। लेकिन बोर्ड पर दर्शाईं गईं बातें केवल विभाग की फाइलों तक सीमित रह गई हैं।

कारण यह कि प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत निर्माण तो दूर की बात है, इससे संबंधित कोई कार्य ही नहीं कराया गया है। आज भी यह सड़क खड़ंजा ही है। और तो और सड़क बनवाने के लिए आई धनराशि का भुगतान भी करा लिया गया है।

ग्रामिण बताते हैं कि अधिकारी और जेई आकर चले जाते हैं। सड़क पिच करवाने के लिए कई बार ठेकेदार से संपर्क किया गया। इस पर लोगों को आश्वासन दिया गया कि एक सप्ताह के अंदर कार्य चालू हो जाएगा। सड़क का कार्य केवल कागजात में हुआ है यही नही बोर्ड रात में लगवाया गया था। ग्राम प्रधान विरेंद्र राय का कहना है कि वर्ष 2007-08 में मनरेगा के तहत खड़ंजा कराया गया है। उसके बाद अन्य किसी विभाग ने सड़क के लिए कार्य नहीं कराया। इस संबंध में पीआईयू के जेई भग्गू प्रसाद का कहना है कि सड़क का पेमेंट हो चुका है। जब उनसे यह पूछा गया कि सड़क बनी ही नहीं तो भुगतान कैसे हो गया तो उनका जवाब था कि कांट्रैक्टर काफी प्रभावशाली है। ऊपर से ही आदेश करा लेता है।

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