बाघों की गणना के बहाने विभाग ने बनायी कुख्यात तस्करों को दबोचने की योजना




कुशीनगर । उत्तर प्रदेश के कुशीनगर सीमावर्ती वाल्मीकि बाघ परियोजना के जंगल में रात दौरान वन प्राणियों का शिकार करने वाले व बन सम्पदा को नुकसान पहुचाने वाले कुख्यात तस्करों को दबोचने की योजना बनने लगी है। वन एवं वन प्राणियों की सुरक्षा के लिए वन विभाग काफी गंभीर है।

इसके लिए जंगल के अति संवेदनशील क्षेत्रों में पर्याप्त संख्या में कैमरा ट्रैप के जरिये वन अपराध को रोकने के प्रति वन विभाग योजना अम्ल में लाने को है। इसी के साथ रात में गश्ती करने वाले वन कर्मियों के पास भी नाइट विजन दूरबीन रहेगा। जो वन कर्मियों को चकमा देकर फरार हो जाने वाले वन अपराधी को पकड़ने में मद्द करेगा।

यह जानकारी देते हुए क्षेत्रीय वन निदेशक संतोष तिवारी ने बताया कि बाघों सहित अन्य बेशकीमती जानवरों की गणना करने में काफी परेशानी हो रही थी। बिहार की एक मात्र टाइगर रिजर्व में कितने बाघ है इसकी वास्तविक गणना करने के लिए कैमरा ट्रैप की खरीद हो रही है।

विभिन्न क्षेत्रों में पर्याप्त संख्या में कैमरा ट्रैप लगाया जायेगा, इससे बाघ समेत अन्य जंगली जानवरों की गणना करने में सुविधा होगी। इसके साथ दुसरा फायदा कैमरा ट्रैप से शिकारी भी पकड़ में आ जायेंगे। चूकि कैमरा ट्रैप गुप्त स्थानों पर सेट होगा इसकी जानकारी संबंधित वनकर्मियों के अलावा अन्य लोगों को नही होगी।

कैमरा ट्रैप में कैद होने के बाद शिकारियों पर शिंकजा कसा जायेगा। दूसरी तरफ वनकर्मियों को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस करने की भी वन विभाग की योजना सफल होने वाली है, जिसके तहत वायरलेस सेट, नाइट विजन दूरबीन सहित अन्य उपकरण की खरीद होगी।

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