इथेनाल युक्त पेट्रोल कि मंजूरी से लोगों को करना पड़ सकता है, स्वास्थ संबंधित समस्या का सामना
आर्थिक स्थिति पर भी पड़ेगा असर।
टाइम्स ऑफ कुशीनगर संवाददाता
घुघली, महराजगंज। इथेनॉल (एथिल एल्कोहॉल) पहले से ही फैटी लीवर, त्वचा कैंसर, तंत्रिका तंत्र से जुड़ी समस्या, पाचन तंत्र के रोग का बड़ा कारक रहा है। अब जब इथेनॉल युक्त पेट्रोल की अनिवार्यता सरकार द्वारा की जा रही है तो अनेक विकट आर्थिक और शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। ये बाते सदस्य विश्व विज्ञान संगठन अमरेन्द्र शर्मा ने कही।
श्री शर्मा ने बताया कि एथेनॉल का पेट्रोल में मिश्रण और केवल इथेनॉल के प्रयोग से गाड़ियां चलाना पर्यावरणीय समस्या और पेट्रोल पर निर्भरता कम करेगा यह दिखता नहीं है। एक मॉलिक्यूल इथेनॉल के जलने में तीन मॉलिक्यूल ऑक्सीजन का प्रयोग होता है तथा दो मॉलिक्यूल कार्बन डाइऑक्साइड और तीन मॉलिक्यूल पानी वाष्प के रूप में निकलेगा।

यद्यपि कार्बन डाइऑक्साइड पेट्रोल की तुलना में कम तो निकलेगा लेकिन तीन मॉलिक्यूल वाष्प के रूप में पानी का निकलना पहले से ही चार प्रतिशत पानी वातावरण में पिछले 40 साल में बढ़ चुका है जिसके फल स्वरुप पृथ्वी तेजी से गर्म हो रही है।
साथ ही साथ समुद्र के अधिक जलवाष्प के वाष्पन में यह एक और जुड़ाव करेगा जिससे विभिन्न प्रकार के समुद्री तूफान में वृद्धि होगी जो पृथ्वी के पर्यावरण को तेजी से बदल देगा।
*शारीरिक समस्या*
वातावरण में जलवाष्प की उपलब्धता के कारण सम्बन्धित आद्रता बढ़ेगी फलतः जीवाणु और अन्य रोग जनक सूक्ष्मजीवियों की संख्या बढ़ने से संक्रामक रोगों का विस्तार होगा।
*आर्थिक समस्या*
इथेनॉल युक्त पेट्रोल का प्रयोग करने से गाड़ियों के इंजन की लाइफ भी कम होगी। इथेनॉल माइलेज घटाएगा, इंजन में लगे प्लास्टिक पार्ट एवं रबर पार्ट को गला देगा। एल्यूमिनियम, लोहा आदि के साथ क्रिया करके उसमें जंग लगाने को प्रोत्साहित करेगा। गाड़ियों के शौकीनों के ऊपर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।
मध्य वर्ग के लोग अत्यधिक प्रभावित होंगे।
रिपोर्टर: सतीश कुमार श्रीवास्तव
टाइम्स ऑफ कुशीनगर
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