मुद्दों के उपजाऊ भूमि में मुलायम ने बोया सियासत का बीज



टाईम्स आफ कुशीनगर व्यूरों
कुशीनगर। राम के पैरों तले रौदी गयी पडरौना की धरती पर पहुंचे सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने एक बार फिर चुनावी माहौल में मुद्दों की उपजाऊ भमि पर हल चलाकर सियासत का बीज बो डाला।

पडरौना के उदित नरायण डिग्री कालेज के मैदान में अपने प्रत्याशी राधेश्याम सिंह व वालेश्वर यादव के पक्ष में चुनावी जनसभा को सम्बोधित कर रहे श्री यादव को उम्र के लिहाज से थोड़ी भी थकान नही थी। पूरे जोश में निकलते उनके शब्द काफी प्रभावशाली थे। हालकि वह गोरखपूर से लौटे हुए थे। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मंच पर पहुंचते ही बिना किसी औपचारिकता के सीधे माइक संभाली और संबोधन शुरू कर दिया। आलम यह था कि उनके जाने के बाद भी एक घंटे तक सभा चली क्योंकि स्थानीय नेता बोल ही नहीं पाए थे। नेताजी मतलब मुलायम सिंह ने पडरौना की जनता का रंग देखकर अपने राजनीतिक पत्ते एक-एक कर खोले। इसके लिए पहले उन्होंने सियासी पैंतरे के लिहाज से मुद्दों की जमीन तरासी। वोटों की फसल के लिए बीज बोने शुरू कर दिये।

अपने आप को किसानों का नेता मानने वाले मुलायम सिह यादव ने कहा कि सभी हवा में चुनाव लड़ रहे हैं लकिन हम जमीन पर आपके पास है। वह भी मुद्दों की जमीन है। हमनें यूपी में मौका मिला तो करके दिखाया है। लैपटाप बांटे, कन्या विद्याधन योजना दिया। समाजवादी एंबुलेंस सेवा शुरू की। बहुत कुछ है गिनाने को जो आपको किसी ने नही दियें। हम रा काम जाति-धर्म के नाम पर बांटकर राजनीति नहीं करना नही है बल्कि हम बात कर रहे हैं शिक्षा, चिकित्सा, रोजगार की। जो सबको बराबर मिले। इसको बेहतर बनाने के लिए हमें  वोट चाहिए। संकेतों में कहा कि मोदी की तरह हम विकास का झूठा बोल नही बोलते, हमारा विकास आपके सामने है। जब बात अल्पसंख्यक की आई तो नेताजी पूरी तरह से फ्रंट फुट पर आ गए और कहा कि केवल सपा ने इनका भला किया। देश में इनकी बदतर हालात के लिए गैर सपाई सरकारें जिम्मेदार हैं। मुजफ्फरनगर दंगे में हमने मरहम लगाया औरों ने तो उसे कुरेद कर नासूर बना दिया।

मुसलमानों को लुभाने के लिए उन्होंने उनको आरक्षण देने की बात मंच से कह डाली। उन्होंने पुलिस के चेहरे को साफ करने की बात पर कानून में कुछ संशोधन की बात कह डाली। सही को न्याय और दोषी को सजा निश्चित मिलेगी।ताकि पीडि़त को न्याय मिल सके। यह नही इसके लिए सामने खड़ी भीड़ से हामी भी भरवाई।

समाजवादियों की गढ़ मानी जाने वाली धरती का यह वही मैदान था, जब 2004 के लोक सभा चुनाव में श्री यादव को जुते खाने पड़े थे और काफी फजियत होना पड़ा था। जो तमासा भी बना था पर सियायात ने सबभूला दिया। वहीं कभी जुता चलाने वालें मंगलवार को श्रोता बनकर घ्यान लगाये श्री सिंह की प्रश्नों पर हामी भर रहे थे।  हालाकि नेताजी ने लोकसभा के चुनाव में वोटों की फसल के लिए पडरौना की घरती हर वो तीर चलाये जो उन्हे दिल्ली तक ले जा सकते है।

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