वैज्ञानिकों ने दी मृदा परीक्षण आधारित खेती की सलाह, असंतुलित उर्वरक प्रयोग से नुकसान की चेतावनी
टाईम्स आफ कुशीनगर व्यूरो
ललितपुर।
विकासखंड जखौरा के ग्राम बम्हौरीकला में “फसलों में उर्वरकों के संतुलित प्रयोग” विषय पर विशेष जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, बांदा अंतर्गत संचालित कृषि विज्ञान केन्द्र, ललितपुर एवं केन्द्रीय कृषि वानिकी अनुसंधान संस्थान, झांसी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ।
कार्यक्रम का नेतृत्व कृषि विज्ञान केन्द्र के प्रभारी डॉ. अनुज कुमार गौतम तथा केन्द्रीय कृषि वानिकी अनुसंधान संस्थान, झांसी के प्रधान वैज्ञानिक (कृषि प्रसार) डॉ. आर. पी. द्विवेदी ने किया।
डॉ. द्विवेदी ने कृषकों से आह्वान किया कि वे अपने खेतों की नियमित मृदा जांच कराएं और उसी के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करें। उन्होंने बताया कि जैसे मानव के भोजन में संतुलन आवश्यक है, उसी प्रकार फसलों के लिए भी सभी पोषक तत्वों का संतुलित होना जरूरी है। अधिक उर्वरक प्रयोग से लागत बढ़ने के साथ-साथ मृदा की उर्वरता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
कार्यक्रम में विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. दिनेश तिवारी ने बताया कि वर्ष 2025 में जिले के किसानों द्वारा डीएपी, टीएसपी और एमएपी का 30073 मीट्रिक टन अधिक प्रयोग किया गया, जिससे मृदा में पोषक तत्वों का असंतुलन बढ़ा है। उन्होंने सलाह दी कि किसान मृदा परीक्षण, फसल की आवश्यकता और वैज्ञानिक अनुशंसा के आधार पर एनपीके कॉम्प्लेक्स एवं एसएसपी उर्वरकों का संतुलित उपयोग करें।
विशेषज्ञों ने हरी खाद (ढैंचा), जैव उर्वरक (राइजोबियम, पीएसबी), गोबर की सड़ी खाद, केंचुआ खाद व नाडेप खाद के प्रयोग पर भी जोर दिया। साथ ही किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम में डॉ. सरिता देवी सहित अन्य वैज्ञानिकों ने भी फसलों, फल एवं सब्जियों में संतुलित उर्वरक उपयोग की जानकारी दी। इस दौरान ग्राम बम्हौरीकला के राम चरण, मनोज, करन, लक्ष्मी देवी, कस्तूरी बाई सहित 30 से अधिक प्रगतिशील किसान एवं महिला कृषकों ने भाग लिया।

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