मिलों भी चलेंगी, किसानों को मिलेगा बकाया भी,  मूल्य भी होगा 300 रूपये के आसपास

मुजफ्फरनगर। राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के मंडल संयोजक विकास बालियान ने कहा कि हमने पहले भी कहा था कि कोई भी गन्ना किसान घबराए नही क्योंकि गन्ने के दाम 300 रूपये प्रति कुन्तल के आस पास मिलेंगे और चीनी मिल भी चलेंगी। साथ ही किसानों का पिछला बकाया ब्याज समेत मिलेगा। अगर ऐसा ना हुआ तो खड़े गन्ने का रेट लेंगे चीनी मिलो से लेकर रहेंगे। मगर फिर भी बहुत से किसान भाई घबरा रहे थे।

विकास बालियान ने कहा कि इस बार किसान संगठन, सियासी दल, मिलांे की आपसी नूरा कुश्ती में किसानो को डराने का काम किया गया और अदालत के आदेश के बावज़ूद भुगतान नही हुआ।

बाद मे अदालत पर भी ना जाने क्या दबाव पड़ा कि 8 अक्टूबर को सुनाया जाने वाला फैंसला आज तक नही सुनाया गया, जबकि अदालत को सुप्रीम कोर्ट की बात रखते हुए केवल इतना कहना था के किसानो का पैसा ब्याज समेत दिया जाए। ये चुनावी साल है।

 प्रदेश सरकार ने एक साज़िश के तहत ऐसा महैल बनाया कि चीनी मिले, मिल नही चलाएंगी। उनकी हालात खराब है, ऐसा दर्शाया गया कि किसानो को इस बार 240 रूपये से ऊपर रेट नही मिलेगा। ये सब एक खेल था साज़िश थी।
उन्होंने कहा कि  दरअसल प्रदेश सरकार किसानो की नज़र मे महान बनना चाहती थी। प्रदेश सरकार ने जानबूझकर किसानो का बकाया दिलवाने की कोशिश नही की। प्रदेश में किसानों को जानबूझकर आंदोलन करने के लिए माहौल बनवा रही है ताकि अब वो किसानो के बीच आकर उनका हितेशी होने का दावा कर सके।

 सरकार कहेगी देखिए मिले मिल चलना नही चाहती थी, परंतु मिलों को घाटा होने के बाद भी सरकार ने मिले चलवाई। अब सरकार यह भी कहेगी कि मिले 240 रूपये से ऊपर रेट देना नही चाहती थी मगर हमने 300 रूपये का रेट दिलवाया। इतना ही नहीं सरकार यह भी श्रेय लेने से नहीं चूकेगी कि मिलो पर आपका 2400 करोड़ रूपये बकाया था, मिले घाटे मे होने के कारण वो भुगतान देने मे असमर्थ थी मगर इस किसान हितैषी सरकार ने वो भुगतान दिलवाया। उन्होनंे कहा कि ये सब किसान भाइयो नूरा कुश्ती थी, हमने पहले ही कहा था जिसे दुकान चलानी है चलाए, जिसे आंदोलन करना है करे या ना करे, मिले चलेंगी नवम्बर के आखरी
हफ्ते मंे और गन्ना मूल्ये 300 रूपये के आसपास होगा।

 साथ ही यह भी कहा था कि किसानो को ब्याज सहित ही गन्ना भुगतान होगा। उन्होंने कहा कि एक बार ब्याज मिलने लगे फिर कभी आपका भुगतान देरी से नही होगा। उन्होंने कहा कि हमारी लड़ाई ब्याज की है और हाँ जब तक ब्याज नही मिलता तब तक किसी भी प्रकार के कृषि ऋण की वसूली सरकार गन्ना किसान से नही कर पाएगी।